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जरदारी के साथ अमेरिका नहीं जाएंगे शरीफ
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18 जुलाई 2008
वार्ता

इस्लामाबाद।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और सत्तारुढ़ गठबंधन के वरिष्ठ नेता नवाज शरीफ ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सह अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी के साथ इस महीने अमेरिका जाने से इंकार कर दिया है।

स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक शरीफ के इंकार के बाद जरदारी काफी परेशान हैं।

हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक संबंधी वॉशिंगटन की पहली आधिकारिक यात्रा में जरदारी भी साथ में होंगे अथवा नहीं।

जरदारी की मंशा थी कि यदि शरीफ उनके साथ अमेरिका जाने को राजी होते तो वे प्रधानमंत्री के दौरे के साथ ही अपनी यात्रा करते। जरदारी के एक सहयोगी ने कहा कि यदि पाकिस्तान की सत्तारुढ़ मौजूदा राजनीतिक गठबंधन सरकार के सभी अहम नेता एक साथ वॉशिंगटन जाते तो इस प्रकार के संयुक्त अमेरिकी दौरे की अहमियत और बढ़ जाती।

जज मुद्दा: जरदारी- शरीफ के बीच वार्ता टूटी

उल्लेखनीय है कि पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की हाल में देश और देश के बाहर काफी लोकप्रियता बढ़ी। पाकिस्तान में हाल में एक अमेरिकी एजेंसी द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण में शरीफ पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं।

शरीफ के राजी नहीं होने से नाराज जरदारी ने कहा कि पीएमएल (एन) गठबंधन सरकार को सुचारु रुप से चलाने में मदद नहीं कर रही है और इस तरह सरकार के लिए कई चीजें मुश्किल हो गई हैं। पार्टी के एक अधिकारी ने बताया, “इससे पहले किंग अबदुल्ला के साथ बैठक के लिए पीपीपी नेता एवं गिलानी के साथ सउदी अरब जाने से शरीफ के इंकार के बाद अब वॉशिंगटन जाने से मना करने के बाद जरदारी पूर्व प्रधानमंत्री से नाराज हैं”।

पीपीपी के अधिकारी का कहना था कि जरदारी के साथ नवाज शरीफ की रियाद यात्रा का महत्व और बढ़ जाता क्योंकि वहां की सरकार ने तेल की सुविधा एवं अन्य रियायत देने के बारे में पहले ही सहमति जता दी है। पीपीपी के अधिकतर नेताओं का मानना है कि उनकी सरकार अपनी मंशा के मुताबिक काम नहीं कर पा रही है, क्योंकि पीएमएल (एन) उसकी राह में रोड़े अटका रही है।

पीपीपी कार्यकर्ताओं को लगता है कि इसमें किसी की साजिश हो सकती है लेकिन उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। कुछ लोगों ने तो दबी जुबान में यह भी कहना शुरु कर दिया है कि पाकिस्तान की गठबंधन सरकार जल्द ही बिखर जाएगी क्योंकि पीपीपी इस तरह और अधिक दिनों तक नहीं रह सकती।

पाक उपचुनावों में नवाज की पार्टी का वर्चस्व


ऐसी घड़ी में अपदस्थ जजों की बहाली के मुद्दे पर नवाज शरीफ के लचीले रुख के चलते भी पीपीपी को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर पीपीपी, पीएमएल (एन) प्रमुख की राय से पूरी तरह इत्तेफाक नहीं रखती।

जरदारी की पार्टी अपदस्थ मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी के खिलाफ पूरी तरह जहर उगल रही है और यह याद दिलाने की कोशिश कर रही है कि सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख रहते हुए उनका कैसा प्रदर्शन रहा था। हालांकि उनके पास इस समस्या का कोई हल नहीं है कि यदि दोनों पक्ष अपदस्थ जजों की बहाली को लेकर अपनी राय पर अड़े रहे, तो क्या होगा।

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