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17 जुलाई 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
पैसाडेना (कैलिफोर्निया)। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर जीवन के ताजा प्रमाण मिलने का दावा किया है।
दो अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने कहा है कि एक समय मंगल पर बड़ी झीलें, नदियां और पानी के कई अन्य स्रोत मौजूद थे, जिससे वहां पर जीवन की काफी संभावना बनती है।
वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष मंगल के लिए ‘कॉम्पैक्ट रिकॉनैसैन्स इमैजिंग स्पेक्ट्रोमीटर’ (सीआरआईएसएम) और नासा के ‘मार्स रिकॉनैसैन्स ऑरबिटर’ (एमआरओ) के दो उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से निकाला है।
मंगल पर मिला पदार्थ बर्फ है?
अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान जर्नल ‘नेचर’ के गुरुवार के अंक में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि मंगल के प्राचीन पहाड़ी क्षेत्र कच्चे खनिज पदार्थों से भरे पड़े हैं और ये खनिज पदार्थ पानी के अभाव में तैयार नहीं हो सकते थे। मंगल का करीब आधा क्षेत्र पहाड़ी है।
वैज्ञानिकों ने इन कच्चे खनिज पदार्थों को ‘फिलॉसिलिकेट्स’ नाम दिया है, जो करीब 4.6 अरब से 3.8 अरब साल पहले बने होंगे।
सीआरआईएसएम उपकरण बनाने वाले वैज्ञानिकों के हवाले से कहा गया है कि पृथ्वी पर उस वक्त की चट्टानों को करीब-करीब नष्ट किया जा चुका है, लेकिन मंगल पर फिलौसिलिकेट की मौजूदगी वाली चट्टाने वहां पर पानी के होने की संभावनाओं को प्रबल करती हैं और इससे वहां पर जीवन के संकेत मिलते हैं।
मंगल ग्रह पर भी सांस ले सकेंगे यात्री
‘नेचर जियोसाइंस’ पत्रिका में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के मुताबिक मंगल पर हजारों सालों तक पानी मौजूद रहा होगा, तभी वहां पर कच्चे खनिज पदार्थ तैयार हुए होंगे।
इस अध्ययन के लेखक के मुताबिक मंगल पर मौजूद कच्चे खनिज पदार्थों में जैव तत्व मौजूद हैं। ऐसे में यदि इन क्षेत्रों में अगर कभी जीवन मौजूद रहा होगा, तो संभावना है कि इसके अवशेष डेल्टा क्षेत्रों में मौजूद हों।
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