09 मई 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली। वायदा बाजार की नियामक संस्था फॉरवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) द्वारा चना, सोया तेल, रबर व आलू के वायदा कारोबार पर रोक की घोषणा से इंदौर स्थित देश का सबसे पुराना कमोडिटी एक्सचेंज नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड (एनबीओटी) में कारोबार बंद होने की सम्भावना बढ़ गई है।
एफएमसी के चेयरमैन बी.सी. खटुआ के अनुसार सरकार के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय से सबसे ज्यादा इंदौर स्थित कमोडिटी एक्सचेंज नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड (एनबीओटी) को जूझना होगा। खटुआ के मुताबिक इस एक्सचेंज में सिर्फ सोया तेल का कारोबार होता है और सरकार ने इसके वायदा कारोबार पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में एक्सचेंज को बंद करने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं है।
पढ़ें: वायदा कारोबार पर रोक से जानकार नाराज एफएमसी से जारी पाक्षिक रिपोर्ट के अनुसार 15 अप्रैल को समाप्त हुए पहले 15 दिनों के दौरान नायबाट का कुल टर्नओवर पिछले महीने की समान अवधि की तुलना में 39.08 फीसदी गिरकर 2,390.48 करोड़ रुपए रह गया। साथ ही वाल्यूम भी समान अवधि के दौरान 50 फीसदी गिरकर 4 लाख 22 हजार 115 टन तक नीचे आ गया।
उधर, सोयाबीन प्रोसेसर्स एसेसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के अनुसार सरकार के निर्णय को किसी भी तरह से वाजिब करार नहीं दिया जा सकता।
सोया तेल के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध को समीक्षक भी बेतुका करार दे रहे हैं। उनके मुताबिक देश की कुल खाद्य तेल जरूरत का तकरीबन 50 फीसदी यानी 50 लाख टन विदेशों से आयात होता है। ऐसे में सरकार का कदम अप्रभावी होगा।
कारोबारी इस मुद्दे पर कह रहे हैं कि सरकार द्वारा खाद्य तेलों पर जारी आयात कर में कटौती से लेकर समाप्ति के मद्देनजर सोया तेल की कीमतों में तकरीबन 20 रुपए प्रति लीटर तक की कमी आ चुकी है जबकि आयातित सोया तेल की कीमत तकरीबन 60 रुपए प्रति लीटर पड़ती है। इसलिए सरकार के यह उपाय प्रभावी होंगे, इसकी आशा कम ही है।
पढ़ें: चार वस्तुओं के वायदा कारोबार पर रोक बाजार समीक्षकों की राय है कि सरकार कीमतों पर नियंत्रण के लिए खाद्य तेलों के बफर स्टॉक की व्यवस्था पर विचार करे और देश में तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दे।