14 अगस्त 2008
सीएनएन-आईबीएन
नई दिल्ली। कलकाता उच्च न्यायालय ने रिजवानुर रहमान मामले में अपना फैसला आगामी दो सप्ताह के लिए सुरक्षित रखा है। न्यायालय ने इस मामले में सीबीआई को सातों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
आज कलकता उच्च न्यायालय ने सीबीआई को इस मामले में जांच आगे बढ़ाने के साथ सभी आरोपी और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने का आदेश दिया है।
रिजवानूर मामले की सुनवाई समाप्त इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को इस गंभीर मामले पर ढीलाई बरतने के लिए जमकर खरी-खोटी सुनाई। उच्च न्यायालय ने कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त प्रसून मुखर्जी की भी आलोचना की।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायधीशों के खंडपीठ ने कहा कि, “प्रसून मुखर्जी ने इस मामले पक्षपाती रवैया अपनाते हुए टोडी परिवार का बचाव किया।” खंडपीठ ने कहा कि मुखर्जी ने इस मामले की तह तक जाने के बजाय इसे तूल देते हुए तनाव को बढ़ाया।
वहीं, इस मामले की जांच लगभग पूरा कर चुकी सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि ये बात अब पूरी तरह साफ है कि रिजवान ने ‘दबाव और परेशानी’ में आकर आत्महत्या की थी।
रिजवानुर ने आत्महत्या की- सीबीआई उल्लेखनीय है कि 30 वर्षीय रिजवानुर रहमान कोलकाता में ग्रैफिक डिजाइनर था। 21 सितम्बर 2007 को एक व्यवसायी की बेटी से शादी करने के बाद उसकी लाश दमदम के पाकीपुकुर रेलवे स्टेशन पर रहस्यमय हालत में मिली थी।
इस मामले में सीबीआई ने रिजवान के ससुर अशोक टोडी, उनके भाई प्रदीप टोडी और एक सामाजिक कार्यकर्ता सईद मुईयुद्दीन उर्फ पप्पू के खिलाफ रिजवानुर को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की थी। ऐसी खबर थी कि पप्पू ने रिजवानुर रहमान को धमकी दी थी कि अगर उसने व्यवसायी अशोक टोडी की बेटी प्रियंका को तलाक नहीं दिया, तो इसके ‘गंभीर परिणाम’ होंगे।
रिजवान मामले में सीबीआई रिपोर्ट तैयार इस मामले में चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों- पुलिस उपायुक्त ज्ञानवंत सिंह और अजय कुमार, सब इंस्पेकटर कृष्णेन्दु दास, खुफिया विभाग के पूर्व सहायक आयुक्त सुकांति चक्रवर्ती के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई थी।