21 अगस्त 2008
वार्ता
बीजिंग। पहलवान सुशील कुमार के कुश्ती में कांस्य पदक जीतने और मुक्केबाज विजेंद्र कुमार के कांस्य पदक सुनिश्चित करने के साथ ही भारत ने ओलंपिक में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का नया रिकॉर्ड बना दिया।
पढ़ें: पहलवान सुशील कुमार को ओलंपिक कांस्य पदक भारत के लिए बीजिंग ओलंपिक का 12वां दिन भाग्यशाली रहा। इस दिन भारत के हाथ एक कांस्य पदक लगा और एक कांस्य पदक तय हो गया। इसके साथ ही इस ओलंपिक में भारत के तीन पदक हो गए हैं जो ओलंपिक में उसके 108 सालों के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
पढ़ें: मुक्केबाज विजेन्द्र ने पदक पक्का कियाइससे पहले भारत ओलंपिक में केवल दो बार दो-दो पदक जीत पाया था। साल 1900 के पेरिस ओलंपिक में भारत ने दो रजत पदक जीते थे। जबकि 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में उसके खाते में एक स्वर्ण और एक रजत पदक आया था।
बीजिंग ओलंपिक पर विशेष-हेलसिंकी का प्रदर्शन भारत का ओलंपिक में बीजिंग से पहले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। हेलसिंकी में भारत ने हॉकी में स्वर्ण और कुश्ती में कांस्य पदक जीता था।
पढ़ें: मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक है- विजेंद्र कुमार लेकिन बीजिंग में भारत इनसे आगे निकल गया। निशानेबाज अभिनव बिंद्रा के स्वर्ण जीतने के बाद पहलवान सुशील कुमार ने 66 किग्रा वर्ग के फ्रीस्टाइल मुकाबले में कल कांस्य पदक जीता। जबकि मुक्केबाज विजेंद्र ने 75 किग्रा के मिडलवेट वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के लिए कांस्य पदक पक्का कर दिया।
पढ़ें: भारत है पहलवानों का देश! विजेंद्र सेमीफाइनल मुकाबला जीतकर स्वर्ण और रजत पदक के मुकाबले में भी जा सकते हैं।
पढ़ें: मीडिया पर भड़के कुश्ती गुरू जगमिन्दर बीजिंग ओलंपिक का 12वां दिन भारत के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। पहलवान सुशील ने 56 सालों के अंतराल के बाद देश को कुश्ती में कोई पदक दिलाया। इससे पहले पहलवान के.डी. जाधव ने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था।
पढ़ें: गुरू सतपाल को समर्पित है पदक- सुशील मुक्केबाज विजेंद्र का नाम तो भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया है। वह मुक्केबाजी में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनेंगे।
पढ़ें: अभिनव बिंद्रा ने स्वर्ण पदक जीता भारत ने इससे पहले पिछले तीन ओलंपिक में एक-एक पदक जीता था। साल 1980 के मॉस्को ओलंपिक में हॉकी का स्वर्ण जीतने के बाद भारत अगले तीन ओलंपिक 1984 लॉस एंजेलिस, 1988 सोल और 1992 बार्सीलोना में खाली हाथ रहा था।
पढ़ें: अभिनव को ‘भारत रत्न’ दिया जाए: मिल्खा 1996 के अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर पेस ने टेनिस का कांस्य पदक, 2000 के सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने भारोत्तोलन का कांस्य पदक और 2004 के एथेंस ओलंपिक में राज्यवर्द्धन राठौर ने निशानेबाजी का रजत पदक जीता था।
पढ़ें: ‘मेरा लाडला देश का सबसे योग्य कुंवारा है’ लेकिन इस बार भारत ने कामयाबी का तीसरा चरण भी छू लिया है। विश्व प्रसिद्ध ‘एकांउटेंसी फर्म प्राइसवाटरहाउसकूपर्स’ ने बीजिंग ओलंपिक में भारत के छह पदक जीतने की जो भविष्यवाणी की थी वह 50 प्रतिशत तो पूरी हो गई है।
पढ़ें: अपना पदक देश को समर्पित करता हूं- बिंद्राभारत ने ओलंपिक में बीजिंग से पहले अपने 104 सालों की भागीदारी में कुल 17 पदक जीते थे। जिनमें से 11 पदक (आठ स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य) तो हॉकी में ही थे। इसके अलावा उसने एथलेटिक्स में दो तथा कुश्ती, टेनिस, भारोत्तोलन और निशानेबाजी में एक-एक पदक जीता था।
पढ़ें: खेल में ग्लैमर नहीं, कठिन मेहनत जरुरी बीजिंग में तीन पदकों के साथ भारत की ओलंपिक में कुल पदक संख्या अब 20 पहुंच जाती है। विजेंद्र का पदक समीकरण कांस्य पर भी टिका रह सकता है या फिर उनके नाम रजत या स्वर्ण भी आ सकता है। इसका फैसला अगले दो दिनों में हो जाएगा। लेकिन फिलहाल इतना तय हो चुका है कि भारत ने बीजिंग ओलंपिक में अपना नया इतिहास रच दिया है।
तस्वीरें देखें-बीजिंग में मिली भारत को खुशियां
बीजिंग से आई बिंद्रा की तस्वीरें