20 नवम्बर 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने राजस्थान मंडप में जयपुर से आए मनमोहन अग्रवाल के बनाए टेबल कैलेंडर को देखने और खरीदने वालों की भीड़ लगी हुई है।
इसकी खासियत यह है कि कैलेंडर कभी भी पुराना नहीं होगा। मनमोहन का दावा है कि उन्होंने दुनिया का ऐसा पहला टेबल कैलेंडर बनाया है जो कि कभी खत्म नहीं होगा। लीक से हटकर काम करना ही मनमोहन के मिजाज में है। अपने कामों से वे दो-दो विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा भी जताते हैं।
पढ़ें: सोनपुर मेले में ‘लालू खिलौने’ की धूम सबसे पहले उन्होंने एक पोस्टकार्ड पर 1,111 बार गणपति की तस्वीर बनाई। इस काम में उन्हें करीब डेढ़ साल का वक्त लगा। मनमोहन की इस उपलब्धि के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। इस सफलता ने उनके हौसले को इतना बढ़ाया कि उन्होंने सात साल की कड़ी मेहनत के बाद दुनिया का पहला कभी न खत्म होने वाला टेबल कैलेंडर ईजाद किया।
विश्व के सबसे लंबे इस कैलेंडर की लंबाई बीस फीट है। इसे तैयार करने में उन्होंने किसी कंप्यूटर की सहायता नहीं ली, बल्कि ‘मैथड पाइंट’ से सभी कामों को हाथ से पूरा किया। ऐतिहासिक तारीखों और घटनाओं की गणना को मनमोहन ने ‘मैथड पाइंट’ का नाम दिया है।
कैलेंडर बनाने से पहले मनमोहन ने देश की तमाम ऐतिहासिक घटनाओं का अध्ययन किया। वह पुरातात्विक महत्व की उन जगहों पर भी गए, जहां पीतल के प्राचीन कैलेंडर मिलते हैं। इस दौरान उन्होंने पाया कि सभी कैलेंडरों की गणना का आधार आमतौर पर एक ही होता है।
पढ़ें: म.प्र. में अंतर्राष्ट्रीय रामलीला मेला पेशे से व्यापारी मनमोहन अग्रवाल कहते हैं कि, “मेरी दिलचस्पी शुरू से ही लीक से हटकर काम करने में थी। कॉलेज में मैंने पोस्टकार्ड पर सबसे ज्यादा गणपति बनाए। इस उपलब्धि पर मुझे सम्मान भी मिला। मैंने महसूस किया कि मार्केट में 100 साल से ज्यादा का कैलेंडर आसानी से नहीं मिलता, बस उसी दिन मैंने एक ऐसा कैलेंडर बनाने की ठान ली, जो कभी खत्म न हो।”
वे कहते हैं कि ऐतिहासिक धरोहरों और घटनाओं का अध्ययन करने के दौरान मैंने पाया कि जिस तरह हम अक्सर कहते हैं कि इतिहास दोहराया गया, उसी तरह कैलेंडर भी अपने आप को रिपीट करता है। हर 700 साल बात कैलेंडर की तारीखें वहीं होती हैं, जो सात सौ साल पहले थी। वे मंडप में इस कैलेंडर को टेबल कैलेंडर के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
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