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अपमान बनाता है बच्चों को अपराधी
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19 नवम्बर 2008
सीएनएन-आईबीएन
निकिता मिश्रा

नई दिल्‍ली।
युवाओं में उपेक्षा और उत्पीड़न को देखते हुए उनमें भय का माहौल उत्पन्न होने लगा है। गौर करने वाली बात यह है कि युवाओं में बढ़ते अवसाद या फिर उनमें समन्वय की कमी की तरफ किसी का भी ध्यान नहीं जाता।

लगातार उत्पीड़न की वजह से युवाओं की सहनशक्ति खत्म होती जा रही है, और वह अपराध की दुनिया में कदम रखने लगते हैं।

उत्तर प्रदेश के मेरठ की पूर्व मिस मेरठ प्रियंका ने अपने माता-पिता की हत्या करने की बात स्वीकार की है। प्रियंका का कहना है कि, “हां, मैंने अपने माता-पिता को मारा है लेकिन जानबूझकर नहीं। मैंने इसके लिए कोई योजना नहीं बनाई थी।”

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प्रियंका का अपराध बिना सोच-समझकर किया गया अपराध है। लेकिन इस तरह के अपराधिक मामलों में बाल शोषण एक बहुत ही अहम वजह साबित हो रही है। खासकर, एक लड़की का अपराधबोध ग्रस्त होना और उसकी उपेक्षा।


तो क्या इस तरह की भावना दोहरा अपराध करने का इंतजार करती है?

मनोचिकित्‍सक अर्पिता आनंद का कहना कि, “हिंसा बच्‍चों के मन पर गहरा प्रभाव डालती है, जिसके कारण वह टूटने लगते हैं और गलत काम करने लगते हैं।”

इस तरह के अपराध का विभिन्‍न का प्रकार से परिभाषित किया गया है।

यूनीसेफ द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार, इस तरह के अपराध में 49 प्रतिशत मामले ऐसे परिवार में देखने को मिले हैं जहां दो लड़कियों के बाद एक लड़के की इच्‍छा रखी जाती है।

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मनोविशेषज्ञ डॉ.अर्पिता आनंद कहती है कि, “किसी भी तरह की हिंसा या अपमान और शोषण का बच्चे के दिमाग पर गहरा असर होता है, और जब यह प्रतिशोध फूटता है, तो फिर बच्चों को सही-गलत का बोध नहीं रहता।”

2006 में निमहंस द्वारा कराए गए अध्ययन के मुताबिक 46 प्रतिशत मामलों में मानसिक या शारीरिक तौर पर शोषित लोग अपराधी बन जाते हैं।

मेरठ के इस दोहरे हत्याकांड पर नजर डालें, तो यह ना केवल पुलिस, बल्कि मनोविशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए चेतावनी है। फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा, हिंसक वीडियो गेम और यहां तक टेलीविजन पर दिखाई जाने वाली हिंसक वारदातें देखते हुए बच्चों का दिमाग हिंसा और अपराध का आदि होने लगा है।

इस मामले पर डॉ.अमित सेन कहते हैं कि, “मुझे लगता है कि कई बच्चे और खासकर लड़कियां जो अपने आपको अलग-थलग और उपेक्षित और शोषित महसूस करती है, एक न एक दिन अपराध के गर्त में जा गिरती हैं।”

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यह वक्त की अहम जरुरत है कि पूरा समाज इस अपराध की संजीदगी को समझे। परिवार और खासकर परिवार के सदस्य बाल शोषण, अपमानजनक व्यवहार जैसे चीजों के गंभीर परिणामों को समझने की कोशिश करें, जो उनके अपने घर में होती है।



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