19 नवम्बर 2008
सीएनएन-आईबीएन
स्मृति आडवाणी
नई दिल्ली। शेयर बाजार में 80 लाख रुपए गंवाने के बाद हरियाणा के हेलीमंडी में रहने वाले व्यवसायी राजेन्द्र गुप्ता ने आत्महत्या कर ली।
राजेन्द्र गुप्ता ने भले ही अपनी पत्नी की साड़ी की मदद से आत्महत्या कर ली, लेकिन शेयर बाजार के इस जबरदस्त घाटे के बावजूद वह मौत को गले लगाने से पहले एक पत्र छोड़ गए, जिसमें लिखा था कि, “मेरी आंखें किसी को दान कर दी जाएं।”
पढ़ें: शेयर बाजार में घाटा ले डूबा उपेन्द्र को इस पत्र से उनके मानसिक हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पिछले कुछ महीनों में राजेन्द्र जैसे कई लोग है जिन्होंने शेयर बाजार में हुए घाटे के बाद आत्महत्या कर ली। इन मामलों ने कम से कम यह तो साबित कर दिया है कि शेयर बाजार में आपकी जिन्दगी भर के मेहनत की कमाई एक बार में डूब सकती है।
विमाहंस में चिकित्सकीय परीक्षिक डॉ.जीतेन्द्र नागपाल कहते हैं, “शेयर बाजार में निवेशक करने वाले युवा पेशेवरों की तादाद बहुत ज्यादा है और उनके मन में हमेशा असुरक्षा और अनिश्चितता का माहौल बना रहता है। खासकर ऐसे समय में वह अपने आप को निस्सहाय महसूस करते हैं।”
पढ़ें: गुडगांव के व्यापारी ने खुदकुशी की यहीं चिंता जब हद से ज्यादा बढ़ जाती है, तो फिर लोगों के सामने आत्महत्या जैसे विचार आ जाते हैं। लेकिन ऐसे समय में आपको अपने परिवार और आस-पास के लोगों से कुछ और चीज ग्रहण करने की जरुरत है।
मुम्बई में चिकित्सकीय परीक्षक डॉ.हरीश शेट्टी कहते हैं कि, “अगर एक काम करने वाला व्यक्ति ऑफिस की बातें अपने परिवार से छुपाता है, देरी से घर लौटता है, ऑफिस के फोन कॉल नहीं उठाता या फिर किसी हथियार के लिए लाइसेंस रखने की कोशिश करें, तो उन्हें तुरंत किसी सलाहकार से मिलना चाहिए।”
जानकारों का मानना है कि ऐसे मुश्किल हालात में जरुरी है चुनौतियों को स्वीकार करना और सलाहकारों से परामर्श लेकर आप मुश्किल घड़ी से निपट सकते हैं।