17 नवम्बर 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली। बच्चों को मधुमेह से बचाना है तो उन्हें जंक फूड से बचाना होगा। यदि बच्चे स्कूल कैंटीन के लिए कुछ खुले पैसे मांगें तो उनके हित में उन्हें मना करना होगा।
हाल में एक शोध से यह बात सामने आई है कि 10 से 14 वर्ष की उम्र के 85 प्रतिशत स्कूली बच्चों में पाया गया
मधुमेह उनकी
खान-पान की असंयमित आदतों की वजह से है।
पढ़ें: मधुमेह को रोक सकती है ग्रीन टी यह अध्ययन दिल्ली सरकार की भागीदारी योजना के तहत दिल्ली डायबिटीज रिसर्च सेंटर(डीडीआरसी) द्वारा राजधानी के 5,802 स्कूली बच्चों पर किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि बच्चों में पैदा हो रही स्वास्थ्य समस्या खान-पान में पाश्चात्य शैली के प्रवेश की वजह से है।
अध्ययन के मुताबिक, कम से कम 11 प्रतिशत बच्चे स्कूल कैंटीनों में दोपहर का खाना
खाना पसंद करते हैं और घर से अपना खाना नहीं लाते। जबकि 81प्रतिशत बच्चे कम-से-कम सप्ताह में एक बार फास्ट फूड लेना पसंद करते हैं। 62 प्रतिशत से अधिक बच्चे बर्गर या पिज्जा और 47 प्रतिशत बच्चे हर रोज कम-से-कम 1 शीतल पेय लेते हैं।
पढ़ें: बच्चों की मधुमेह जांच कारगर नहीं डीडीआरसी के अध्यक्ष अशोक झिंगन ने कहा कि, “इन वजनी बच्चों में वजनी प्रौढ़ बनने और
मधुमेह , हृदय रोग और उच्च रक्तचाप की 70 प्रतिशत संभावना रहती है।”