06 जनवरी 2009
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मालिकाना हक न देने पर अदालत जाएं
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14 नवम्बर 2008
आवाज़ प्रॉपर्टी गुरू

अचल सम्पत्ति से जुड़े मामलों पर कानूनी विशेषज्ञ विनय सिंह की राय:


सवालः ‘फ्री होल्ड’ प्लॉट के लिए हमें ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) से एनओसी चाहिए। जीडीए कह रही है कि एनओसी के लिए हमें पट्टा (लीज) किराया देना होगा, क्योंकि पट्टा किराया से ही उनके दफ्तर का खर्च चलता है। हम फ्री होल्ड जगह पर पट्टा किराया कैसे जमा कर सकते हैं? क्या करें? (सुशील अग्रवाल, ग्वालियर)

जवाबः
‘फ्री होल्ड’ जगह पर पट्टा किराया देने की जरूरत नहीं है। शायद पट्टे किराया के नाम पर जीडीए विकास खर्च मांग रही हो। अदालत की अवमानना के लिए मामला दर्ज करते हुए साथ ही अदालत से इस मसले पर जल्द फैसला करने की गुजारिश करें। सभी सदस्यों को साथ मिलाकर कार्रवाई करें।

पढ़ें: पति की सम्पत्ति पर पत्नी का कितना हक?  

सवालः 2005 में नारायण बिल्डर्स की योजना में 50 प्रतिशत रकम देकर प्लॉट बुक किया है। मालिकाना हक मिलने पर बकाया 50 प्रतिशत देने की शर्त थी। 2008 में बिल्डर के मांगने पर हमने उसे बकाया पैसे दे दिए, लेकिन मालिकाना हक की बजाय उसने हमें सिर्फ एक अस्थाई आवंटन पत्र दिया। मालिकाना हक मांगने पर वो मालिकाना हक की तारीख टालता रहता है, क्या करें? (अभिषेक शर्मा, जयपुर)

जवाबः इस मामले में स्थानीय वकील की मदद लें और मालिकाना हक में देरी की वजह पता लगाने की कोशिश करें। भवन निर्माता ने मौजूदा जमीन से ज्यादा प्लॉट बेचे हों तो उसे कानूनी नोटिस भेजें। अगर इसके बावजूद भवन निर्माता मालिकाना हक न दे तो उसके खिलाफ उपभोक्ता अदालत में मामला दर्ज करें।

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