12 नवम्बर 2008
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गायत्री महादेवन“मैं शेयर या बीमा में निवेश करने में विश्वास नहीं रखता, मुझे यह जुए जैसा लगता है”, कहते हैं मुम्बई में मीडिया कम्पनी में कार्यरत पेशेवर 32 वर्षीय सुरेश तलेकर।
इसलिए उन्होंने अचल सम्पत्ति यानी प्रॉपर्टी में निवेश किया और एक नहीं बल्कि दो जगहों पर!
मुम्बई के कांदिवली में खुद के मालिकाना हक वाले घर के अलावा, उन्होंने इन अचल सम्पत्ति में निवेश किया है:- 2007 में पुणे के प्रमुख इलाके में 25 लाख के एक बेडरूम-हॉल-रसोईघर वाले आवास में।
- 2007 में ही नासिक में 17 लाख के दो बेडरूम-हॉल-रसोईघर वाले आवास में जो उभरते प्रौद्योगिकी पार्क के बेहद नजदीक है।
इसके पीछे उनकी मंशा थी: उन्हें आवास ऋण पर ब्याज भुगतान पर कर छूट मिलता है और साथ ही वे सम्पत्ति भी बना और बढ़ा रहे हैं।
मुश्किल: उन्होंने यह दो घर खरीदते समय शुरुआती भुगतान (डाउन पेमेंट) के लिए अपनी पूरी बचत लगा दी।
दोनों ऋण की जानकारी:- पुणे के घर के लिए 20 साल की अवधि का 12.75 प्रतिशत ब्याज दर पर 18 लाख रुपए का कर्ज। इसकी मासिक किस्त (ईएमआई) है 20,769 और शुरुआती भुगतान किया सात लाख रुपए का।
- नासिक के घर के लिए 20 साल की अवधि का 12.75 प्रतिशत ब्याज दर पर 10.40 लाख रुपए का कर्ज। इसकी मासिक किस्त है 12,000 और शुरुआती भुगतान किया 6.60 लाख रुपए का।
सबसे पहले जानते हैं कि दो-दो कर्ज लेना क्या सही निर्णय था?
वित्तीय सलाहकार श्रीधर वेटापलम का कहना है, “सही किया या नहीं यह तो नकदी के आने और खर्च पर निर्भर करता है।”
सुरेश के मामले में यह सही निर्णय नहीं था। ऐसा इसलिए क्योंकि:- उन्हें प्रति माह 50,000 रुपए का वेतन हाथ में मिलता है। वैसे हाल में उनकी पत्नी ने एक मानव संसाधन कम्पनी शुरू की, इसलिए उनकी ओर से अब तक कोई योगदान नहीं है। चार सदस्यों के लिए उनके पास महीने का 17,000 रुपए बचता है। (50,000 में से ईएमआई के 33,000 घटाकर)। यानी उनका बजट कुछ तंग है।
नेक सलाह: याद रखें कि अपनी आय का 30 प्रतिशत से ज्यादा ईएमआई में न भरें।
श्रीधर का कहना है, “उन्होंने अचल सम्पत्ति में कुछ ज्यादा ही निवेश कर दिया है। एक सम्पत्ति में निवेश करने की बात समझ में आती है लेकिन दूसरी सम्पत्ति में निवेश करने की बात हजम नहीं होती। अब तो वे कर्ज तले दब गए हैं।”
1. नासिक की प्रॉपर्टी के लिए:वे इसे बेचना चाहते हैं लेकिन भविष्य में कीमतें उठने का इंतजार कर रहें हैं। मौजूदा दर के हिसाब से 20 लाख मिलेंगे जिससे उन्हें तीन लाख रुपए का लाभ होगा।
क्या उन्हें बेचना चाहिए?अगर बहुत जल्दबाजी न हो तो वे इंतजार कर सकते हैं। वित्तीय योजनाकार रामगणेश अय्यर का कहना है, “प्रॉपर्टी की कीमतों में आगे भी गिरावट की सम्भावना है। तो अगर हो सके तो सुरेश इंतजार कर सकते हैं।”
जोंस लांग लसाले मेघराज के सहायक निदेशक आशुतोष लिमाया का कहना है, “नासिक जैसी जगहों में आने वाले 15 महीनों तक सम्पत्ति बेचना मुश्किल होगा। फिलहाल यह खरीदारों का बाजार हो गया है, यानी खरीदार मोल-भाव कर सकते हैं। देखा जाए तो उन्हें कम से कम डेढ़ साल तक इंतजार करने के बाद स्थिति देखनी चाहिए।”
साथ ही अगर वे इस समय घर बेचते हैं, तो उन्हें अल्प अवधि के पूंजीगत लाभ कर का बोझ सहना पड़ेगा जो 30 प्रतिशत है। तो उनका लाभ हो जाएगा 2.10 लाख रुपए का (तीन लाख में से 90,000 रुपए कर के घटाकर)। अगर वे तीन साल तक इंतजार कर सकते हैं तो उन्हें कम कर लगेगा (केवल 20 प्रतिशत का)।
2. पुणे की प्रॉपर्टी के लिए:पैसे की तंगी को दूर करने के लिए वे उसे किराए पर देने का विचार कर रहे हैं। पूछताछ करने पर उन्हें पता चला है कि उन्हें 10,000 रुपए प्रति माह का किराया मिल सकता है।
फैसला: पैसे की कमी दूर करने के लिए किराया पर घर देना अच्छा विकल्प है।
- उन्होंने क्या नहीं किया जो करना चाहिए था?
- जोखिम को बांटा नहीं: सुरेश ने अपने 100 प्रतिशत पैसे अचल सम्पत्ति में लगा दिए। उनकी निवेश की राशि है 22 लाख रुपए की जो किसी भी एक क्षेत्र में निवेश करने के लिए काफी ज्यादा है।
- जीवन बीमा: दो कर्ज और निर्भर पत्नी, बच्चे, माता-पिता होने की वजह से उन्हें कम से कम 50 लाख रुपए का जीवन बीमा तो लेना ही चाहिए।
- चिकित्सा बीमा: बूढ़े माता-पिता के कारण उन्हें कम से कम एक लाख रुपए का चिकित्सा बीमा तो लेना ही चाहिए। अगर कम्पनी उनके चिकित्सा खर्च का भुगतान करती है तो भी उन्हें कम से कम 50,000 रुपए का बीमा तो करवाना ही चाहिए।
- आपातकालीन फंड: सुरेश को आपातकालीन स्थिति के लिए तीन महीने की ईएमआई राशि और मासिक खर्च के बराबर की राशि का कोष बनाकर रखना चाहिए।
पैसे के सही प्रबंधन के अन्य उपायों के लिए देखिए wealth.moneycontrol.com