21 अगस्त 2008
वार्ता
लंदन। पिछले पांच वर्ष की तुलना में वर्ष 2008 के पहले छह महीने का
तापमान अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया है। विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार पिछले कुछ वर्षों की तुलना में यह पूरा वर्ष निश्चित रूप ठंडा रहेगा लेकिन ऐतिहासिक औसत से तापमान अधिक रहेगा।
पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार महासागरों तरंगों में बदलाव आदि प्राकृतिक कारणों से प्रतिवर्ष वैश्विक
तापमान में उतार-चढ़ाव दर्ज किया जाता है। हालांकि इसमें गिरावट के बावजूद ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से होने वाले वैश्विक तापमान बढ़ोत्तरी को नजरंदाज नहीं किया जा सकता जिसका प्रभाव लंबे समय के लिए होता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वर्ष
तापमान में आई कमी के लिए वैश्विक मौसम पैटर्न ‘अल नीनो’ भी कुछ हद तक जिम्मेदार है। अल नीना एक परिक्रमण काल है जिसके तहत कुछ समय गर्म और कुछ समय अपेक्षाकृत ठंडा होता है।
डब्ल्यूएमओ में मौसम के आंकड़े और निगरानी के लिए जिम्मेदार ओमर बद्दौर ने कहा कि, “इस बात की पर्याप्त संभावना है कि पिछले पांच वर्षों की तुलना में इस वर्ष तापमान कुछ कम रहेगा। निश्चित रूप से ‘अल नीनो’ का इस वर्ष के वैश्विक तापमान पर प्रभाव रहेगा लेकिन यह तापमान को कितना प्रभावित करेगा यह हम नहीं कह सकते”।
श्री बद्दौर ने कहा कि, “इस वर्ष जुलाई के महीने तक दर्ज आंकड़े के अनुसार यह वर्ष पिछले पांच वर्षों की तुलना में ठंडा है। हालांकि फिर भी ऐसा लगता है कि औसत रूप से तापमान अभी भी अधिक है”।
पढ़ें: तापमान बढ़ने से गेहूं उत्पादन को खतरा ब्रिटेन के मौसम बदलाव अनुसंधान केंद्र के अनुसार इस वर्ष जुलाई का औसत तापमान 1961-1990 के औसत तापमान से 0.28 डिग्री सेल्सियस अधिक है। इसके अनुसार वर्ष 2000 के बाद से वर्ष 2008 के पहले छह महीने का तापमान सबसे कम है।
केंद्र के वैज्ञानिक जॉन हेमंड ने बताया कि, “वर्ष 2008 के पहले छह महीनों में अल नीनो के प्रभाव के कारण ठंडे थे लेकिन संकेतों से पता चलता है कि इसका प्रभाव अब निष्क्रिय हो रहा है। इसके कारण इस वर्ष के अगले कुछ महीनों में विश्व के औसत तापमान में फिर बढ़ोतरी हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1850 से भरोसेमंद
तापमान दर्ज होना शुरू हुआ। वर्ष 2007 को समाप्त दशक सबसे गर्म रहा। पिछले सौ वर्ष की तुलना में विश्व का वर्तमान औसत तापमान 0.74 डिग्री सेल्सियस अधिक है। मौसम बदलाव पर संयुक्त राष्ट्र के अंर्तसरकारी पैनल के वैज्ञानिकों के अनुसार वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी में ग्रीनहाउस गैस प्रमुख कारण हैं।