21 अगस्त 2008
सीएनन-आईबीएन
अभिर वी.पी
बेंगलुरु। बेंगलुरु के पब और डिस्को पर पुलिस की गाज गिरने के बाद से बेंगलूरु में
डीजे (डिक्स जॉकी) काफी उदास हो गए हैं क्योंकि वे अब बेरोजगारी की कगार पर आ गए हैं। अधिकतर बेंगलूरुवासी पार्टी आदि से दूर रहने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं और इसकी वजह से शहर के डीजे का जीना मुश्किल हो गया है।
पढ़ें: डिस्क जॉकी: ‘रीमिक्स’ करें करियर बनाएं डीजे गोअपु का कहना है कि, “वे हमें हमारा काम करने नहीं दे रहे जिसकी वजह से हमारी आय पर असर पड़ रहा है। हमें भी अपने परिवार का भरन-पोषण करना होता है”। लेकिन पुलिस का कहना है कि, “वे शहर के सार्वजनिक मनोरंजन की जगहों पर जाकर कर्नाटक आबकारी कानून को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं”।
इसी बीच शहर के डीजे का कहना है कि प्रशासन रेस्तरां और क्लब से भी डांस बार की तरह सुलूक नहीं कर सकते। गोअपु का कहना है कि, “हमें अधिकारियों को यह बताना है कि इक्के-दुक्के लोगों की वजह से पूरे उद्योग को सजा नहीं देनी चाहिए। हम तो केवल अच्छे संगीत के जरिए लोगों का मनोरंजन करते हैं”।
गोअपु जैसे अन्य डीजे का कहना है कि अगर चीजें इसी तरह चलती रहीं तो उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। पुलिस के छापे से शहर के रेस्तरां और डिस्को की व्यापार 80 प्रतिशत तक गिर चुका है।
गोअपु कहते हैं कि, “अगर मैं रसोइया हूं और कोई खाने के लिए कोई लोग ही न बचें तो मेरे पास केवल दो विकल्प बचते हैं, एक तो खाना बनाना छोड़कर, बाजार में जाकार मोजे बेचना शुरू कर दूं, या फिर ऐसी जगह चले जाऊं जहां मैं अपनी कला यानी डिस्क जॉकी का काम आराम से कर सकूं”।
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डीजे की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है, लेकिन अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो एक दिन ऐसा आएगा जब आपको अपने पसंदीदा डीजे को सुनने के लिए मैसूर जैसे पड़ोसी शहर जाना पड़ेगा।