18 अगस्त 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
अजरा रहमान
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षकों व छात्रों की व्यावहारिक जरूरतों के मद्देनजर कम अवधि के कई पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। ‘शैक्षिक प्रशासन पाठ्यक्रम’ इनमें से एक है, जहां विश्वविद्यालय के शिक्षक अपनी प्रशासनिक क्षमता विकसित करेंगे।
विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफलांग लर्निंग(आईएलएल) के निदेशक और रसायन विज्ञान के प्रोफेसर ए. के. बख्शी ने कहा कि , “यह एक ऐसा पाठ्यक्रम है जिसे वह जल्द से जल्द शुरू करना चाहेंगे।”
पढ़ें: बदले जाएंगे डीयू के उबाऊ विज्ञान पाठ्यक्रम उन्होंने कहा कि, “छात्रों को पढ़ाना और किसी प्रशासनिक जिम्मेदारी का वहन करना, दोनों अनुभव एक दूसरे से काफी अलग हैं। कई बार शिक्षकों को प्रशासनिक उत्तरदायित्व को निभाना पड़ता है, जो काफी चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। शिक्षकों के लिए आईएलएल जैसे पाठ्यक्रम की जरूरत महसूस करने की मुख्य वजह यही है।”
बख्शी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि, “इस पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद शिक्षकों को निश्चय ही अपनी नई जिम्मेदारियों को वहन करने में सहजता महसूस होगी। शुरू में वरिष्ठ शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, क्योंकि उनके प्रशासनिक पदों पर उनकी नियुक्ति की संभावनाएं अधिक होती हैं।”
पढ़ें: राजनीतिक अखाड़ा बना दिल्ली विश्वविद्यालय! उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में समय-समय पर अल्पावधि वाले पाठ्यक्रमों को चलाया जाता रहा है, “लेकिन मैं समझता हूं कि आईएलएल को शुरू करना एक बड़ी सफलता होगी।” छात्रों को अंग्रेजी भाषा की व्यावहारिक जानकारी देने के लिए सितंबर महीने से एक नया पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है, जिससे कि वे अपने संचार कौशल को विकसित कर सकें। पाठ्यक्रम की समय सीमा चार महीने की होगी। श्री बख्शी ने कहा कि सभी पाठ्यक्रमों के लिए न्यूनतम शुल्क ढाई हजार रुपये रखा जाएगा।