13 अगस्त 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
अजरा रहमान
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (
डीयू ) में विज्ञान पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए तय अंक सीमा में कटौती और बड़ी संख्या में सीटों का खाली रहना विज्ञान की पढ़ाई में छात्रों की घटती दिलचस्पी के संकेत हैं।
ऐसे में
डीयू ने विज्ञान पाठ्यक्रमों को सुधारने की प्रक्रिया तेज कर दी है, ताकि छात्रों को विज्ञान की पढ़ाई उबाऊ न लगे।
डीयू के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ लॉन्ग लर्निंग’ (आईएलएल) के निदेशक ए. के. बक्शी ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि, “छात्र-छात्राओं की विज्ञान में घटती रुचि की वजह पाठ्यक्रमों का उबाऊ होना है। पुराने पाठ्यक्रमों को लंबे समय से बदला नहीं गया है। उन्हें अधिक से अधिक रोजगारपरक और रुचिकर बनाए जाने की जरूरत है। विद्यालय स्तर पर तो कोर्स को समय-समय पर बदला जाता है, पर कॉलेज स्तर पर ऐसा लंबे अंतराल के बाद होता है”।
पढ़ें: ‘विज्ञान में विश्व की समस्या का हल है’ ई-लर्निंग का प्रचार करने के लिए पिछले साल आईएलएल की स्थापना की गई थी। बक्शी के मुताबिक विज्ञान पाठ्यक्रमों को तीन साल पहले दो दशकों बाद सुधारा गया था, पर सुधार में कसर रह गई।
उन्होंने कहा कि, “विज्ञान पाठ्यक्रमों को नियमित अंतराल पर बदले जाने की योजना है। संभवत: दो या पांच वर्षों के नियमित अंतराल पर इनमें व्यापक बदलाव किए जा सकते हैं”।
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डीयू में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर भी हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारी राष्ट्रीय शैक्षणिक शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) जैसे स्कूली शिक्षण संस्थाओं के साथ नियमित संपर्क बनाए रखना चाहेंगे ताकि विज्ञान पाठ्यक्रमों में अद्यतन सुधार होता रहे।
आईएलएल एक महीने के भीतर करीब 10 विज्ञान विषयों पर आधरित अध्ययन सामग्री अपलोड करने जा रहा है। हाल ही में डीयू के दो विज्ञान पाठ्यक्रम में सुधार किया गया और अचानक उनमें छात्रों की दिलचस्पी बढ़ गई।