12 अगस्त 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
कुआलालम्पुर। मलेशिया में भारतीय मूल का एक
छात्र इन दिनों सुर्खियों में है और इसकी वजह यह है कि यह 12वर्षीय किशोर अपने
स्कूल का इकलौता छात्र है। इस विचित्र स्थिति ने इस स्कूल को ऐसे शिक्षण संस्थान का दर्जा दिला दिया है, जहां छात्र से अधिक शिक्षक हैं।
भारतीय मूल का छात्र वी.सिवसंथीरन इस मामले में खुशनसीब है कि
स्कूल के सभी शिक्षकों का ध्यान अब उसी पर केंद्रित रहता है, पर उसकी सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि उसे सहपाठियों का साथ नसीब नहीं है।
पढ़ें: चेन्नई में बिजली बचाते स्कूली बच्चे स्कूल का नजारा ऐसा दिखता है जैसे वह ट्यूशन पढ़ रहा हो। इस
छात्र के बारे में एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि वह इस विद्यालय में चीनी भाषा सीख रहा है। चूंकि वह अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पित है, इसलिए शिक्षकों को उसके कारण रोज ही स्कूल में हाजिर होना पड़ता है।
यह अनूठा स्कूल है एसजेके(सी) पडांग गजाह स्कूल। स्कूल मलेशियाई प्रांत पेराक की राजधानी ताइपिंग से 30 किलोमीटर दूर ट्रांग इलाके में है। इसके प्रधानाध्यापक हैं 55 वर्षीय उई आह बी।
पढ़ें: भारतीयों ने मलेशियाई स्कूल को घेरा इसके अलावा 28 वर्षीय लिम शू मिन, जो छात्रों के घोर अकाल का सामना कर रहे, इस
स्कूल के शिक्षक हैं। मिन अपने इस एकमात्र छात्र को मंदारिन भाषा पढ़ाते हैं जबकि उई उसे अंग्रेजी, कला और संगीत पढ़ाते हैं। इस छात्र की अनूठी कहानी को प्रतिष्ठित अखबार ‘न्यू स्ट्रेट्स टाइम्स’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।
जब अखबार ने
छात्र से पूछा कि वह अकेले इस स्कूल में क्यों पढ़ रहा है तो उसने जवाब में कहा कि, “मेरे पिता चाहते हैं कि मैं चीनी सीखूं। मैं यहां उनका सपना पूरा करने के लिए आता हूं”।
कभी इस स्कूल में छात्रों के ठहाके गूंजा करते थे। दो वर्ष पहले शहर से बड़े पैमाने पर चीनियों के पलायन के कारण स्कूल की ऐसी दशा हुई।