06 जनवरी 2009
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पवनपुत्र मकरध्वज की कथा
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(वेदों से: वेद हिंदुओं का प्राचीनतम धार्मिक ग्रंथ है। यह हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति के मूल्यवान भंडार हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने युगों तक चिंतन-मनन कर इस सृष्टि के रहस्यों की जानकारी इस ग्रंथ में संग्रहित की है। बहुत से देशों के विद्वान आज भी इस प्राचीन ग्रंथ का अध्ययन कर रहे हैं।)

पवनपुत्र मकरध्वज की कथा
   
पवनपुत्र हनुमान बाल-ब्रह्मचारी थे। लेकिन मकरध्वज को उनका पुत्र कहा जाता है। यह कथा उसी मकरध्वज की है।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, लंका जलाते समय आग की तपिश के कारण हनुमानजी को बहुत पसीना आ रहा था। इसलिए लंका दहन के बाद जब उन्होंने अपनी पूँछ में लगी आग को बुझाने के लिए समुद्र में छलाँग लगाई तो उनके शरीर से पसीने के एक बड़ी-सी बूँद समुद्र में गिर पड़ी। उस समय एक बड़ी मछली ने भोजन समझ वह बूँद निगल ली। उसके उदर में जाकर वह बूँद एक शरीर में बदल गई।

एक दिन पाताल के असुरराज अहिरावण के सेवकों ने उस मछली को पकड़ लिया। जब वे उसका पेट चीर रहे थे तो उसमें से वानर की आकृति का एक मनुष्य निकला। वे उसे अहिरावण के पास ले गए। अहिरावण ने उसे पाताल पुरी का रक्षक नियुक्त कर दिया। यही वानर हनुमान पुत्र ‘मकरध्वज’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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जब राम-रावण युद्ध हो रहा था, तब रावण की आज्ञानुसार अहिरावण राम-लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल पुरी ले गया। उनके अपहरण से वानर सेना भयभीत व शोकाकुल हो गयी। लेकिन विभीषण ने यह भेद हनुमान के समक्ष प्रकट कर दिया। तब राम-लक्ष्मण की सहायता के लिए हनुमानजी पाताल पुरी पहुँचे।

जब उन्होंने पाताल के द्वार पर एक वानर को देखा तो वे आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने मकरध्वज से उसका परिचय पूछा। मकरध्वज अपना परिचय देते हुआ बोला-“मैं हनुमान पुत्र मकरध्वज हूं और पातालपुरी का द्वारपाल हूँ।”

मकरध्वज की बात सुनकर हनुमान क्रोधित होकर बोले- “यह तुम क्या कह रहे हो? दुष्ट! मैं बाल ब्रह्मचारी हूँ। फिर भला तुम मेरे पुत्र कैसे हो सकते हो?” हनुमान का परिचय पाते ही मकरध्वज उनके चरणों में गिर गया और उन्हें प्रणाम कर अपनी उत्पत्ति की कथा सुनाई। हनुमानजी ने भी मान लिया कि वह उनका ही पुत्र है।

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लेकिन यह कहकर कि वे अभी अपने श्रीराम और लक्ष्मण को लेने आए हैं, जैसे ही द्वार की ओर बढ़े वैसे ही मकरध्वज उनका मार्ग रोकते हुए बोला- “पिताश्री! यह सत्य है कि मैं आपका पुत्र हूँ लेकिन अभी मैं अपने स्वामी की सेवा में हूँ। इसलिए आप अन्दर नहीं जा सकते।”

हनुमान ने मकरध्वज को अनेक प्रकार से समझाने का प्रयास किया, किंतु वह द्वार से नहीं हटा। तब दोनों में घोर य़ुद्ध शुरु हो गया। देखते-ही-देखते हनुमानजी उसे अपनी पूँछ में बाँधकर पाताल में प्रवेश कर गए। हनुमान सीधे देवी मंदिर में पहुँचे जहाँ अहिरावण राम-लक्ष्मण की बलि देने वाला था। हनुमानजी को देखकर चामुंडा देवी पाताल लोक से प्रस्थान कर गईं। तब हनुमानजी देवी-रूप धारण करके वहाँ स्थापित हो गए।

कुछ देर के बाद अहिरावण वहाँ आया और पूजा अर्चना करके जैसे ही उसने राम-लक्ष्मण की बलि देने के लिए तलवार उठाई, वैसे ही भयंकर गर्जन करते हुए हनुमानजी प्रकट हो गए और उसी तलवार से अहिरावण का वध कर दिया।

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उन्होंने राम-लक्ष्मण को बंधन मुक्त किया। तब श्रीराम ने पूछा-“हनुमान! तुम्हारी पूँछ में यह कौन बँधा है? बिल्कुल तुम्हारे समान ही लग रहा है। इसे खोल दो।” हनुमान ने मकरध्वज का परिचय देकर उसे बंधन मुक्त कर दिया। मकरध्वज ने श्रीराम के समक्ष सिर झुका लिया। तब श्रीराम ने मकरध्वज का राज्याभिषेक कर उसे पाताल का राजा घोषित कर दिया और कहा कि भविष्य में वह अपने पिता के समान दूसरों की सेवा करे।

यह सुनकर मकरध्वज ने तीनों को प्रणाम किया। तीनों उसे आशीर्वाद देकर वहाँ से प्रस्थान कर गए। इस प्रकार मकरध्वज हनुमान पुत्र कहलाए।

(साभारः वेदों की कथाएं, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)


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पाठकों की राय
06 जनवरी 2009
Jan 05, 2009
तीस इस आ गूड स्टोर्य तंकस
jitu jaipur
Dec 27, 2008
अरे ये तो भगवान का जमाना है। कुछ भी संभव है। यहां तो पसीने से बच्चा पैदा कर दिये हमारे लेखेक साहब.................नहीं तो हमारे देवी देवता शरीर के उबटन से,और पता नहीं किस-किस चीज से बच्चे पैदा हुए है।  पर लेखेक साहब को बहुत-बहुत ध्नयवाद हमारी जानकारी बढ़ाने के लिये।  ऐसे ही जानकारी आप हम सब को दिया करीये। जिसेसे हम सब की जानकारी बढ़े।
NISHTHA NOIDA
Dec 17, 2008
खूप छान गोस्ट आहे
sumit pune
Dec 16, 2008
बहुत ही अच्छी जानकारी है! मगर इसका मज़ाक ना उड़ाईए क्योकि हनुमान जी के बारे मे सबको पता है के वो एक बाल भ्रंचरी थे!
gucci jodhpur
Dec 16, 2008
बहुत ही अच्छी जानकारी है.
sameer mumbai
Dec 16, 2008
अरे भाई येह इंडिया है. यहा सबकुछ पोस्सिबल है . बेसे मे भी सोच रहा हूँ की मे भी बच्चे बोर्न करके एक क्रिक्केट टीम बना दूं.
sunil kumar Mathura(u.p.)
Dec 16, 2008
अबे अक्ल के गधों तुम्हारी बुद्धि क्या घास चरने गई है, अगर पसीने की बूँद से बच्चा पैदा होता तो पूरी दुनिया में रहने को ठिकाना भी नही होता,और मज़े की बात ये होती की कुँवारी लड़की और लड़के के गर्मी के मौसम में 1000-2000 बच्चे पैदा हो जया करते, हिसाब ज़रूर लगाना
GUDDU NOIDA SEC-5
Dec 10, 2008
सर का तो आचि है ल पसीने से कभी बचा हो ता हे. बचो को मत बताना. उन्न पर ग़लत प्रभाव पड़ेगा
raam sevak hanuman kota
Dec 04, 2008
सब कुछ सुनकर अच्छा लगता है बचपन से ही सुनता आ रहा हू. रामलीला देखी काफ़ी कुछ सुना और सुनने की इच्छा जागी पढ़ा भी पर आज सब बेमानी सा लगता है क्योकि साएंस यह सब मानने के लिए तैयार नही है. पर जो भी हो यह सब हो सकता है अगर अनुभव करना हो तो अपनी आँखे बंद करो और खो जाओ . अन्जानी सी डगर पर सुनसान घाना स्याह अंधेरा हो और तुम एक गुफ़ा से निकलते हुए किसी अनजान जगह पर पहुच जाते हो. फिर अचानक आपको लगता है की यह सब तो पहले देख चुका हू यह सब हो चुका है भी. अनिवे कुछ भी हो सकता है , यार इंडिया है , इंडिया इज़ दा ग्रेट हमारी बात छोड़ दो अपने दिल से पूछो धन्यवाद बाक़ी बाद मे ओके बाय.
Santosh Dehradun
Dec 03, 2008
बहुत अच्छी जानकारी है !
vivek delhi
Dec 02, 2008
आप की ये कहानी बहोद आकची है .. आप के कारण ही हमे पहले की जानकारी मिल पति है नही तो आजकल कों ऐसी जानकारी हमे देता है...
pooja mandsaur
Dec 01, 2008
आप कहीं पागल तो नही हो पसीने की बूँद से भे बचा पैदा हो सकता है
narendra pauri garghwal
Dec 01, 2008
यह कहानी बहुत अच्छी लगी विपिन कुमार शिव कोलोनय पिलिभीत र्ोआड खतिमा उधमसिंघ नगर
Vipin kumar khatima (U.S.Nagar)
Nov 24, 2008
अबे कार्टून वो डलफ़िंन थी पानी मे गिरने से पहले ही निगल गयी थी........
NAGRAJ SAHARANPUR
Nov 24, 2008
ये सही है एक सच्चा योगी प्रकर्ती के नियमो को भी बदल सकता है क्योकि वह प्रकिर्ति के नियमो से परे चला जाता है . स्वामी विवेकानंदा भी ख़ुद इस बात को मानते थे की-- एक योगी जिसने अपने प्राणो को वश करलिया है वो चाहे तो सूरज -चाँद और तारो को अपने इसारो से हिला सकता है ---स्वामिविवेकानंदा द्वारा लिखित पुस्तक ,राज योग से , है तो सैनी जी अब क्या बोलते है ?
LEMA GOV
Nov 24, 2008
सैनी जी , लगता ह की आपने बहुत ग्रंथ पढ़ लिए है . महाभारत के बारे म क्या ख़्याल है जिसमे अपनी मा के खने पर वेद- वयाश ने योग बल से केवल द्रस्टी -मात्र से पांडु व ध्रतरास्ट्रा की माताओ को गर्भवती बना दिया था . गणेश जी के बार मे भी पढ़ा होगा , कार्तिकेय के बारे मे क्या ख़्याल है . हनुमान एक महा योगी थे और फिर आजीवन ब्रंचारी भी उनमे अत्हा बल था . एक पूरण योगी कुछ भी कर सकता है वो प्रकर्ती के नियम भी बदल सकता है ..
ABHYA AHAMADAVAD
Nov 24, 2008
यह बेकार की बातें हैं, जब हमारे वेद- पुरान ये कहते है की बिना संभोग के संतान की उत्पत्ति संभव नही है, तो आप ये कैसे कह सकते है की पसीना पानी में गिरा उसे मछली निगल गई और उससे बच्चा पैदा हो गया, आप बेवकूफ़ तो नही लगते फिर ऐसी बात क्यो करते हो, क्योकि पसीना पानी में गिरेगा तो वो गिरने से पहले ही पानी में घुल जाएगा. लिखने से पहले सोचा ज़रा करो
KRISHANA SAINI GARHMUKTESWAR
Nov 24, 2008
ये बात कुछ हजम नही हुई ,ब्रह्मचारी,पसीना,मछली,.................. कुछ अलग तरह की .........परीभाषा है ये .............ख़ुद सोचिए................?
ek hindustani sara jahan hamara
Nov 22, 2008
वेरय निसे
HRIDAY KUMAR SINGH NEW DELHI
Nov 22, 2008
यह बहुत ही आकची जानकाझ है
Nirmal Tiwari Delhi
Nov 19, 2008
यह जानकारी बहुत ही अच्छी है, धन्यवाद
K.K.BHARDWAJ DELHI
Nov 16, 2008
बहुत अच्छी लगी आशा करते है की आगे भी आप एसी ख़बर लाते रहेंगे धन्यवाद
krishna bhatt wien AUSTRIA
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