चंद्रमा की उत्पत्ति और चंद्रग्रहण की कथा?पुराणों के अनुसार, देवताओं ने अमृत की प्राप्ति के लिए समुद्रमंथन किया था। इसके परिणामस्वरूप समुद्र से चौदह रत्न निकले थे। उन रत्नों में चंद्रमा भी एक था। इसे देवतातुल्य माना गया।
समुद्रमंथन में मिले अमृत को पीने के लिए जब देवता पंक्ति बनाकर बैठे थे तो चुपके से राहु भी उनकी पंक्ति में जा बैठा था। चंद्रमा ने इसकी सूचना भगवान विष्णु को दे दी। भगवान विष्णु ने राहु का सिर काट दिया। माना जाता है कि चंद्रमा से नाराज राहु आज भी जब-तब चंद्रमा को डसने की कोशिश करता है। इसी क्रम में चंद्र ग्रहण लगता है।
चिंतामणि किस देवता का नाम है?यह भगवान गणेश का नाम है। माना जाता है कि कपिल मुनि के पास चिंतामणि नामक एक दुर्लभ रत्न हुआ करता था। एक बार महाबाहु नामक दैत्य ने इस रत्न को कपिल मुनि से छीन लिया। उनके आग्रह करने पर भगवान गणेश महाबाहु को मारकर वह रत्न ले आए और कपिल मुनि को सौंप दिया। तब से गणेश जी का नाम रत्नबाहु भी पड़ गया।
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नवरत्न क्या होते हैं?पुराणों के अनुसार माना जाता है कि ये नौ तरह के बहुमूल्य पत्थर होते हैं, जो नवों ग्रहों के बुरे परिणामों का नाश करते हैं। सूर्य के लिए लहसुनिया, राहु के लिए गोमेद, शनि के लिए नीलम, वृहस्पति के लिए मोती, शुक्र के लिए हीरा, केतु के लिए पन्ना, चंद्रमा के लिए नीलम, मंगल के लिए माणिक, बुध के लिए पुखराज अच्छा माना जाता है। लोग इन्हें आवश्यकतानुसार अंगूठियों में जड़ कर पहनते हैं।
नारायण कौन हैं?इन्हें ही ईश्वर भी कहते हैं। चूंकि ईश्वर से सर्वप्रथम जल की उत्पत्ति हुई थी इसलिए ईश्वर को जल को अयन(धारण) करने वाला यानि ‘नारा-अयन’ कहा गया। ये कण-कण में रचे-बसे माने जाते हैं। इन्हें ही भगवान भी कहते हैं। ये ब्रह्मा के एक रूप थे।
पद्म पुराण में क्या है?पद्म पुराण में भगवान शिव ने अपनी पत्नी पार्वती से भगवान विष्णु की महिमा का वर्णन किया है। इसे पांच खंडों में रचा गया है। इस पुराण में 55,000 श्लोक हैं।
(साभार: हिंदू धर्म तथा मान्यताएं-प्रश्नोत्तरी, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)