कल्पवृक्ष कैसे उत्पन्न हुआ था?पुराणों के अनुसार, यह समुद्र मंथन में निकला था। इस मंथन में निकले चौदह रत्नों में एक कल्पवृक्ष भी था। यह भगवान इन्द्र को मिला था, उन्होंने इसे अपने बगीचे में रोप दिया। यह कभी नाश नहीं होने वाला वृक्ष है। माना जाता है कि यह वृक्ष देवताओं की इच्छा पूरा करता है।
उड़ीसा को प्राचीन काल में किस नाम से जाना जाता था?उड़ीसा को प्राचीन काल में ‘उत्कल’ के नाम से जाना जाता था। पुराणों के अनुसार राजा सुद्युम्न के पुत्र उत्कल के द्वारा बसाए जाने के कारण इस प्रदेश का नाम उत्कल पड़ गया। पुराणों में एक चर्चा के अनुसार भगवान इन्द्र से वृतासुर नामक असुर की लड़ाई इसी प्रदेश में हुई थी।
कालरात्रि क्या है?पुराणों की मान्यताओं के अनुसार यह प्रलय की रात मानी जाती है। माना जाता है कि इस रात्रि को ब्रह्मा को छोड़कर सभी जीवों का अंत हो जाता है। यह दुर्गा के नौ रूपों में एक है।
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चित्रगुप्त कौन हैं? इन्हें चौदह यमराजों में एक माना जाता है। पुराणों में इन्हें सभी प्राणियों के पाप-पुण्य का हिसाब रखने वाला अधिकारी माना जाता है। स्कंदपुराण के अनुसार चित्रगुप्त नामक राजा हिसाब-किताब करने में बहुत दक्ष थे। यमराज ने इन्हें पकड़ कर स्वर्ग में मंगवाया था। यहां इन्हें प्राणियों के पाप-पुण्यों के बारे में लिखने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इनका जन्म ब्रह्मा के शरीर से होने के कारण इन्हें कायस्थ मूल का माना जाता है। कायस्थ लोग आज भी खुद को इनका वंशज मानते हैं।
पुराणों में वर्णित ‘उत्तरखंड’ किस आधुनिक राज्य का नाम है? ‘उत्तरखंड’ का आधुनिक नाम उत्तरांचल (राज्य) है। पुराणों में इस प्रदेश की चर्चा देवभूमि के रूप में की गई है।
यह क्षेत्र हिमालय क्षेत्र में अवस्थित है। यहां बद्रीनाथ जी का प्रसिद्ध मंदिर है। माना जाता है कि यहां, केदारेश्वर, रूद्रनाथ, मध्यमहेश्वर, तुंगनाथ, और कल्पेश्वर नामक भगवान शंकर के पांच रूप हैं। हिमालय के इसी क्षेत्र में पांच प्रयाग- रूद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, नन्दप्रयाग, विष्णुप्रयाग और देवप्रयाग नामक पवित्र जल-कुंड हैं। यह क्षेत्र हिंदुओं का पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है।
(साभार: हिंदू धर्म तथा मान्यताएं-प्रश्नोत्तरी, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)