भगवान किन्हें कहते हैं?
पुराणों के अनुसार तीनों लोकों के प्रधान देवता ही भगवान कहलाते हैं। भगवान शब्द में ‘भ’ का अर्थ ‘सभी प्राणियों का शुभचिंतक’ होता है। ‘ग’ का अर्थ सृष्टिकर्त्ता और वान का अर्थ होता है इन दोनों गुणों को ‘धारण करने वाला’। ये विष्णु हैं, इन्हें वासुदेव भी कहते हैं।
रुद्र कौन हैं?
ये भगवान शंकर के रूप माने जाते हैं। उनकी उत्पत्ति ब्रह्मा जी की भौंहों से हुई थी। भौहों से जन्म होने के कारण इन्हें क्रोध के एक रूप में देखा जाता है। रुद्र 11 माने जाते हैं। चूंकि भगवान शंकर इन रूपों में संहार के बाद सृष्टि भी करते हैं इसलिए उन्हें ‘महादेव’ भी कहा जाता है।
प्रह्लाद कौन थे?
पुराणों के अनुसार प्रह्लाद दैत्यराज हिरण्यकशिपु के पुत्र थे। ये भगवान विष्णु के बड़े भक्त थे। पर हिरण्यकशिपु को विष्णु-भक्ति पसंद नहीं थी। उसने प्रह्लाद को विष्णु की अराधना से मना किया। असफल होने पर वह प्रह्लाद को मारने के उपाय करने लगा। उसे मारने के लिए उसने कई प्रयास किए पर हर बार असफल रहा। एक बार जब हिरण्यकशिपु उसे खंभे में बांध कर मारना चाहता था तो भक्त प्रह्लाद की जान बचाने के लिए भगवान विष्णु नृसिंह अवतार में पृथ्वी पर आए और प्रह्लाद की जान बचाई थी।
अग्नि पुराण में क्या है?
यह 18 पुराणों में एक है। इसमें अग्नि और महर्षि वशिष्ठ के बीच हुए वार्तालाप को लिखा गया है। इसी समय अग्नि देव पहले-पहल महर्षि वशिष्ठ से ईशान-कल्प का वर्णन करते हैं। इसमें कुल 16000 श्लोक हैं। इस पुराण में शिव की महिमा का भी वर्णन है। यह आठवां पुराण हैं।
भागवत पुराण में क्या है?
यह भारत के 18 पुराणों में एक है। माना जाता है कि सृष्टि के आरंभ में भगवान कृष्ण ने मुनि ब्रह्मा को धर्म का उपदेश सुनाया था। वही उपदेश इस ग्रंथ में लिखे गए हैं। इसमें 12 स्कंध, 212 अध्याय और 18000 श्लोक हैं। मूल रूप से, इस पुराण में भगवान कृष्ण की भक्ति की चर्चा की गई।
(साभार: हिंदू धर्म तथा मान्यताएं-प्रश्नोत्तरी, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)
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पाठकों की राय 07 जनवरी 2009