‘ऋग्वेद’ के पहले रचनाकार कौन थे?
मुनि व्यास इस ग्रंथ के प्रारंभिक रचनाकार माने जाते हैं। उन्होंने इसकी शिक्षा ऋषि पेल को दी थी। फिर यह ज्ञान ऋषि पराशर और याज्ञवल्क्य को मिली। अंतिम बार इसकी शिक्षा ऋषि इन्द्रमति ने अपने शिष्य मांडुकेय को दी थी। कालांतर में इन्हीं शिक्षाओं को लिख लिया गया और वर्तमान ऋग्वेद की रचना हुई।
अरुणाचल प्रदेश का पुराणों में क्या महत्व है?
पुराणों के अनुसार इसी प्रदेश में गौतम ऋषि का आश्रम था। महिषासुर का वध यहीं हुआ था। देवी पार्वती ने यहां घनघोर तप किया था।
अष्टावक्र कौन थे?
ये प्राचीन काल के एक ब्राह्मण ऋषि थे। पुराणों के अनुसार जब ये अपनी मां उद्दालक के गर्भ में थे तो इनकी मां ने इनके पिता का अपमान कर दिया था। अपने अपमान से आहत होकर इनके पिता ने शाप दिया कि गर्भ में पल रहे बच्चे का शरीर टेढ़ा-मेढ़ा हो जाएगा। परिणाम स्वरूप इनके आठों अंग टेढ़े हो गए थे।
बाद में चलकर इनके अंग सीधे हुए पर इसके पीछे भी एक कहानी है। एक बार इनके पिता मिथिला के राजदरबार में एक बौद्ध विद्वान से हार गए। शर्त के अनुसार उन्हें नदी में फेंक दिया गया। उनकी मृत्यु हो गई। यह बात जब बालक अष्टावक्र को पता चली तो उन्होंने जाकर उस बौद्ध विद्वान को हराया। फिर वे पिता के आशीर्वाद से समंगा नदी में नहाए और उनके अंग सीधे हो गए।
महाभारत में अर्जुन की क्या भूमिका थी?
अर्जुन अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध थे। ये धनुष विद्या के ज्ञाता माने जाते थे। अर्जुन के धनुष का नाम ‘गाण्डीव’ था। महाभारत के युद्ध में इन्होंने भगवान कृष्ण के सारथी की भूमिका निभाई थी। इनके रथ का नाम ‘कपिध्वज’ था। अर्जुन ही ‘गीता’ की रचना के आधार हैं। दरअसल महाभारत के युद्ध के आरंभ में अर्जुन ने जब देखा कि इनके सामने इन्हीं के बंधु-बुजुर्ग हैं, तो इन्होंने युद्ध करने से मना कर दिया था। उसी समय भगवान कृष्ण ने इन्हें उपदेश दिया। उन्हीं उपदेशों को ‘गीता’ के रूप में लिखा गया।
आयुर्वेद में क्या है?
यह भारत का प्राचीन चिकित्सा शास्त्र है। इसके लेखक अश्वनी कुमार थे। माना जाता हि कि इन्होंने दक्षप्रजापति के धड़ में बकरे का सिर जोड़ा था। पुराणों के अनुसार इन्द्र ने इनकी यह विद्या सीखकर ऋषि धनवंतरी को बताई। आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद भी माना जाता है। इसके आठ विभाग माने जाते हैं, जो हैं- शल्य, शालक्य(सिलाई), काया चिकित्सा(बुखार), तंत्र विद्या(झाड़-फूंक), कुमार चिकित्सा(बच्चों की चिकित्सा), अगद तंत्र (विषैले जीवों के काटने का इलाज ), रसायन विद्या और बीजीकरण।
(साभार: हिंदू धर्म तथा मान्यताएं-प्रश्नोत्तरी, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)
यह खबर आपको कैसी लगी
10 में से 3 वोट मिले
पाठकों की राय 22 नवम्बर 2008