(भारतीय साहित्य की नीति कथाओं का विश्व में महत्वपूर्ण स्थान है। पंचतंत्र उनमें प्रमुख है। पंचतंत्र की रचना विष्णु शर्मा नामक व्यक्ति ने की थी। उन्होंने एक राजा के मूर्ख बेटों को शिक्षित करने के लिए इस पुस्तक की रचना की थी। पांच अध्याय में लिखे जाने के कारण इस पुस्तक का नाम पंचतंत्र रखा गया। इस किताब में जानवरों को पात्र बना कर शिक्षाप्रद बातें लिखी गई हैं।) www.diamondpublication.com
सम्मान के लिए योग्यता जरुरीकिसी नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार वह नशे की हालत में दौड़ते समय लड़खड़ाकर गिर पड़ा। उसके सिर पर घड़े के टूटे हुए टुकड़े से घाव हो गया। उसकी लापरवाही से घाव बढ़ता गया और महीनों बाद मुश्किल से ठीक हुआ। तभी वहाँ अकाल पड़ गया।
इसलिए कुम्हार अपना नगर परदेश चल पड़ा। भटकता-भटकता एक दिन वह जीविका की आशा से राजदरबार में आ पहुँचा। उसके माथे पर चोट का गहरा निशान देखकर राजा ने सोचा-‘यह अवश्य कोई बहादुर व्यक्ति है। इसके माथे पर इतना बड़ा घाव अवश्य वीरतापूर्वक किसी से युद्ध करते समय ही लगा होगा।’
पढ़ें: कान भरने वालों से दूर रहें इसलिए राजा ने उसे अपनी सेना में पद दे दिया। इतना ही नहीं, राजा ने उसे अपना विशेष कृपापात्र बना लिया। उसे राजा से इतना मान-सम्मान पाते देख दूसरे राजदरबारी उससे चिढ़ने लगे।
एक बार राजा को युद्ध की तैयारी करनी पड़ी। जब सारे योद्धा लड़ाई के लिए तैयार हो रहे थे तो राजा ने असमंजस में पड़े उस कुम्हार से एकांत में पूछा-‘भद्र तुम्हारा नाम क्या है? और तुम्हारे सिर पर यह घाव किस युद्ध में लगा था?’
कुम्हार ने कहा-‘महाराज, मेरे माथे पर घाव किसी युद्ध में अस्त्र-शस्त्र से नहीं, बिल्क एक बार नशे में मिट्टी के घड़े पर गिर जाने के कारण लग गया था। मैं कुम्हार हूँ। मेरा नाम युधिष्ठिर है।’ राजा को अपने किए पर बड़ी लज्जा आई। इसके कारण वह अपने कितने ही शूरवीर योद्धाओं की उपेक्षा करता रहा। राजा ने उसे सेना से निकला दिया।
(साभारः पंचतंत्र की कहानियां, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)
पाठकों की राय 22 नवम्बर 2008
Sep 26, 2008
ये काफ़ी अच्छी कहानी है मेरा कहना है की कहानी के संवाद को और बढ़ा सकते हैं, इससे थोड़ा रोमांच और आ जाएगा फिर भी अच्छा संदेश मिलता है कहानी से....
varun k. singh Sultanpur U.P.
Aug 19, 2008
मझे य ख़बर बहुत अच्छी लगी.
madhav goswami mathura
Aug 18, 2008
यह बेकार की कहानी है, इसमे सिर्फ़ यही शिक्षा मिलती है की किसी पर आँख मूंद कर भरोसा या निर्णय नहीं लेना चाहिए...
vishweshwar mehra deoghar