06 जनवरी 2009
बड़ी खबरें:
किताबी दुनिया  »  लोक कथा  »  माँ वैष्णोदेवी
माँ वैष्णोदेवी
ads by google
www.dpb.in

माँ वैष्णोदेवी


आपने जम्मू की वैष्णो माता का नाम अवश्य सुना होगा। आज हम आपको इन्हीं की कहानी सुना रहे हैं, जो बरसों से जम्मू-कश्मीर में सुनी व सुनाई जाती है। कटरा के करीब हन्साली ग्राम में माता के परम भक्त श्रीधर रहते थे। उनके यहाँ कोई संतान न थी।

वे इस कारण बहुत दुखी रहते थे। एक दिन उन्होंने नवरात्रि पूजन के लिए कुँवारी कन्याओं को बुलवाया। माँ वैष्णो कन्या वेश में उन्हीं के बीच आ बैठीं। अन्य कन्याएँ तो चली गईं किंतु माँ वैष्णो नहीं गईं।

वह श्रीधर से बोलीं-‘सबको अपने घर भंडारे का निमंत्रण दे आओ।’ श्रीधर ने उस दिव्य कन्या की बात मान ली और आस-पास के गाँवों में भंडारे का संदेश पहुँचा दिया। लौटते समय गोरखनाथ व भैरवनाथ जी को भी उनके चेलों सहित न्यौता दे दिया। सभी अतिथि हैरान थे कि आखिर कौन-सी कन्या है, जो इतने सारे लोगों को भोजन करवाना चाहती है?

श्रीधर की कुटिया में बहुत-से लोग बैठ गए। दिव्य कन्या ने एक विचित्र पात्र से भोजन परोसना आरंभ किया। जब कन्या भैरवनाथ के पास पहुँची तो वह बोले, ‘मुझे तो मांस व मदिरा चाहिए।’ ‘ब्राह्मण के भंडारे में यह सब नहीं मिलता।’ कन्या ने दृढ़ स्वर में उत्तर दिया। भैरवनाथ ने जिद पकड़ ली किंतु माता उसकी चाल भाँप गई थीं।

वह पवन का रूप धारण कर त्रिकूट पर्वत की ओर उड़ चलीं। भैरव ने उनका पीछा किया। माता के साथ उनका वीर लंगूर भी था। एक गुफा में माँ शक्ति ने नौ माह तक तप किया। भैरव भी उनकी खोज में वहाँ आ पहुँचा। एक साधु ने उससे कहा, ‘जिसे तू साधारण नारी समझता है, वह तो महाशक्ति हैं।’

भैरव ने साधु की बात अनसुनी कर दी। माता गुफा की दूसरी ओर से मार्ग बनाकर बाहर निकल गईं। वह गुफा आज भी गर्भ जून के नाम से जानी जाती है। देवी ने भैरव को लौटने की चेतावनी भी दी किंतु वह नहीं माना। माँ गुफा के भीतर चली गईं। द्वार पर वीर लंगूर था। उसने भरैव से युद्ध किया। जब वीर लंगूर निढाल होने लगा तो माता वैष्णो ने चंडी का रूप धारण किया और भैरव का वध कर दिया।

भैरव का सिर भैरों घाटी में जा गिरा। तब माँ ने उसे वरदान दिया कि जो भी मेरे दर्शनों के पश्चात भैरों के दर्शन करेगा, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होंगी। आज भी प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु माता वैष्णों के दर्शन करने आते हैं। गुफा में माता पिंडी रूप में विराजमान हैं।

(साभार: डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)



ads by google
यह खबर आपको कैसी लगी
10 में से 4 वोट मिले
पाठकों की राय
06 जनवरी 2009
Dec 05, 2008
माँ तेरी लीला अपरमपार.
ajay bhatt Chandigarh
Nov 26, 2008
जै माता दी
tribhuwan singh patwal noida
Nov 13, 2008
जै माता दी
sanoj Kumar Cuttack
Nov 04, 2008
माँ जो भी करती है सही करती है उसको पता है मेरे बच्चों को क्या चाहिए..हम अगर अपनी माँ से सच्चे दिल से जो भी मांगेगे, हमें ज़रूर मिलेगा...बोलो जै माता दी जै माता दी जै माता दी जै माता दी जै माता दी जै माता दी..
pawan kumar himachel
Sep 17, 2008
मां का आर्शीवाद सबका ही भला करता है...मां के दरबार में जो भी जाता है वो ख़ाली हाथ वापस नहीं आता है....बोलो साचे दरबार की जय...
hemant delhi
Aug 09, 2008
विजय प्रकाश पाठक गोंडा उ प माता वैशनो सब पे क्रपा करे जै माता दी
VIJAY PRAKASH PATHAK DISTIK GONDA UTTAR PRADESH
Aug 08, 2008
जै माता दी
vijay guwahati
Aug 07, 2008
माता की किरपा सब पे बनी रहे जै माता दी
SANDEEP DELHI
सम्बंधित ख़बरे - लोक कथा
प्रमुख ख़बरें
आज के वीडियो
शेयर बाजारों में बिकवाली आई
एशियाई शेयर बाजारों से मिलेजुले संकेत।
कम्पनियां ज्यादा लाभांश दें: सरकार
वित्त मंत्रालय अपना घाटा पूरा करने की तैयारी में।
दिल्ली फिर कोहरे से ढकी
सुबह घना कोहरा छाने से रेलगाड़ियां और कई उड़ानें बाधित हुईं, सड़क यातायात भी प्रभावित।
You have an error in your SQL syntax; check the manual that corresponds to your MySQL server version for the right syntax to use near '481 or id=39,481' at line 1
Fatal error: Call to a member function fetch_array() on a non-object in /home/hidip/inc/constantz.php on line 88