www.dpb.in
तेली कौ ब्याहभोलू तेली गांव में करे तेल की सेल,
गली-गली फेरी करे, तेल लेउ जी तेल।
तेल लेउ जी तेल, कड़कड़ी ऐसी बोली,
बिजुरी तड़के अथवा छूट रही हों गाली।
कहं काका कवि, कुछ दिन तक सन्नाटौ छायौ
एक वर्ष तक तेली नहीं गांव में आयौ।
मिल्यौ अचानकर एक दिन, मरियल बाकी चाल,
काया ढीली-पिलपिली, पिचके दोऊ गाल।
पिचके दोनों गाल, गैल में धक्का खावै,
तेल लेउ जी तेल, बकरिया सौ मिमियावै।
हमनें पूछी- ‘यह का हाल है भयौ तेरौ?’
तेली बोल्यौ- ‘काका ब्याह है गयौ मेरौ।’
(साभार: काका की फुलझड़ियां, डायमंड पॉकेट बुक्स, सर्वाधिकार सुरक्षित।)
पढ़ें: काका हाथरसी की चुटकियां