07 जनवरी 2009
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तेनालीराम ने लिया राजा से उधार
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(तेनाली राम के बारे में...
1520 ई. में दक्षिण भारत के विजयनगर राज्य में राजा कृष्णदेव राय हुआ करते थे। तेनालीराम उनके दरबार में अपने हास-परिहास से लोगों का मनोरंजन किया करते थे। उनकी खासियत थी कि गम्भीर से गम्भीर विषय को भी वह हंसते-हंसते हल कर देते थे।  
     विजयनगर के राजा के पास नौकरी पाने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। कई बार उन्हें और उनके परिवार को भूखा भी रहना पड़ा, पर उन्होंने हार नहीं मानी और कृष्णदेव राय के पास नौकरी पा ही ली। तेनालीराम की गिनती राजा कृष्णदेव राय के आठ दिग्गजों में होती है।)

 
तेनालीराम ने लिया राजा से उधार

एक बार तेनालीराम की पत्नी बीमार पड़ी। उसने राजा कृष्णदेव राय से एक सौ स्वर्ण मुद्राएं उधार लीं। जब पत्नी की बीमारी समाप्त हो गई तो राजा ने तेनाली राम को उधार चुकाने के लिए कहा।

तेनाली राम ने बात टाल दी। राजा ने सोचा, “तेनाली राम की नीयत ठीक नहीं है। उसके घर जाकर ही अपना उधार वसूल किया जाए। जब राजा घर पहुंचे तो वहां उन्होंने देखा कि तेनाली राम बिस्तर पर पड़ा है और उसकी मां और पत्नी जोर-जोर से रो रही हैं।” “क्या हुआ इसे?” राजा ने पूछा।

पढ़ें:  तेनालीराम और राज्य में उत्सव

“महाराज, अब यह नहीं बचेंगे, लेकिन यह बड़े कष्ट में हैं। कहते हैं कि जब तक मुझ पर राजा का उधार है, मेरे प्राण चैन से नहीं निकलेंगे।” तेनाली राम की पत्नी ने कहा। राजा बोले, “मैंने उधार छोड़ दिया, तेनाली राम। सच तो यह है कि मैं ये मुद्राएं वापस लेना ही नहीं चाहता।”

एकाएक तेनाली राम बिस्तर से नीचे आ गया और राजा के गले लग गया। “हैं, हैं, यह क्या? मैं तो सोच रहा था कि तुम मरने वाले हो?” हैरान होकर राजा ने पूछा।

“सचमुच महाराज, आपके उधार के बोझ से दबकर तो मैं मर ही गया होता। यह तो आपने मुझे उबार लिया। आपने मुझे अवसर दिया है कि मैं आप जैसे कृपालु राजा की सेवा कर सकूं।” तेनाली राम बोला। इस पर राजा कृष्णदेव राय हंसते नहीं तो क्या करते?

पढ़ें:   तेनालीराम का इम्तिहान

(साभार: तेनालीराम का हास-परिहास, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)


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07 जनवरी 2009
Nov 04, 2008
यह कहानी टेनलिराम की चतुर्ता दिखती है . इसमे थोड़ी हँसी भी आती है. इसलिए मुझे यह कहानी अच्छी लगी. धन्यवाद ! राजेंद्रा सिंघ
Rajendra Singh Sunder Vihar, New Delhi
Oct 31, 2008
ऐसी कहानी को नही छापना चाहिए, इस कहानी में कोई शिक्षा नही है
Sachin Hyderabad
Oct 18, 2008
एक दम बकवास ऐसी कहानी पाठको तक पहूचने से पहेले येह सोचना चाहिए की इस कहानी से हमारे बच्चो को क्या शिक्षा मिलेगी,
rafik hashmi indore
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