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निशाना–मुक्का–कुश्ती
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21 अगस्त 2008

व्यंग्य

जुगनू शारदेय


अब हम अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। 62 साल की उम्र में न तोड़ेंगे तो कब तोड़ेंगे। अभी तो 56 साल के बाद तोड़ा है। दो से तीन हो गए। ओलिंपिक में हमने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया।

ओलिंपिक ही क्यों हमने महंगाई का भी अपना रिकॉर्ड तोड़ा है। घूसखोरी को लोकसभा तक पहुंचा कर घूसखोरी का रिकॉर्ड तोड़ा है। गृह मंत्री ने कुछ न करने का रिकॉर्ड तोड़ा है। प्रधानमंत्री ने अपनी सादगी का रिकॉर्ड तोड़ा है।

रिसर्च से यह भी साबित हुआ है कि प्रधानमंत्री की यात्रा और सेहत पर 2004 से 2006 तक 150 करोड़ खर्च कर कमखर्ची की मिसाल पेश की है। 2007 और 2008 तक तो 250 करोड़ तक पहुंचने का भी रिकॉर्ड तोड़ देंगे।

कभी कभी तो लगता है कि इस रिकॉर्ड तोड़ का रिकॉर्ड हमारे खेल मंत्री मनोहर सिंह गिल एक बार फिर तोड़ देंगे। मुक्केबाज को कुश्तीबाज और कुश्तीबाज को संसद या विधान सभा का सदस्य समझ लेंगे।

कुछ लोग हमेशा रिसर्च करते रहते हैं। जब रिसर्च नहीं करते हैं तो मार्केटिंग सर्वे करते रहते हैं। राजनीतिक दलों ने चुनाव क्षेत्र पर रिसर्च शुरु कर दिया है। कहने का मतलब है कि रिसर्च चलता रहता है।

रिसर्च करने वालों ने पहला रिसर्च निशाना पर किया। आखिर निशानेबाजी में सोना हमें क्यों मिला। यह भी जानकारी मिल गई कि अभिनव बिंद्रा सोना चांदी जैसी चीज नहीं खाते हैं। जम्मू - कश्मीर में सीआरपीएफ का निशाना सही नहीं होता।

फिर अभिनव बिंद्रा का निशाना सही कैसे लगा। रिसर्च चालू आहे। बस लोग इस नतीजे पर पहुंच रहे हैं कि निशानेबाज तो पूरा देश है। न सही गोली का आंदोलनकारी का पत्थर का निशाना कितना निशाने पर लगता है।

अब बात मुक्केबाजी की। आपने तो देखा ही होगा कि कैसे लोग विधानसभा में मुक्केबाजी कर लेते हैं। संसद में आस्तीन चढ़ा लेते हैं। यह प्रेरित करता है हमारे मुक्केबाजों को मुक्केबाजी में कुछ करने का।

रही बात कुश्ती की। देश की एक सरकार को बचाने वाले मुलायम सिंह यादव पुराने कुश्तीबाज रहे हैं। देश राजनीति का अखाड़ा है। आज कल इस अखाड़े में जम्मू और कश्मीर के पहलवान जमे हुए हैं।

यह रिसर्च का मोटा मोटी नतीजा है। पर बिना एनालिसिस के रिसर्च नहीं हो पाता रिसर्च। इसीलिए सरकार ने बाकायदा रिसर्च और एनालिसीस विंग बना रखा है। यह विदेश में अपने देश का जेम्स बांड होता है।

अपने देश में भी यह रिसर्च करता है। अपने ही महिला अधिकारी पर। आखिर जासूस को सब कुछ करना पड़ता है। छेड़छाड़ तो दिल्ली क्या भारत की महिलाओं का भूषण है। अपने देश का रिकॉर्ड भी है नजरों से निशाना मारने का।

इस रिसर्च और एनालिसिसिस का एक नतीजा यह भी निकलता है कि निशानेबाजी, मुक्केबाजी और कुश्तीबाजी में रिकॉर्ड तोड़ ओलिंपिक तमगा पाने का रहस्य महिलाओं पर नजरों का निशाना, छेड़छाड़ की मुक्केबाजी और फतवाबाजी का अखाड़ा भी है।

यह है इंडिया का निशाना– मुक्का– कुश्ती!

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