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बंता की लालटेनफौज की नौकरी से अवकाश प्राप्त करने के बाद संता और बंता कालका-शिमला मार्ग पर बस गए। एक दिन संता ने बंता को लंदन से आए अपने रिश्तेदारों से मिलवाने खाने पर बुलाया। बंता ने सोचा, चूंकि रास्ता तेज ढलान वाला है इसलिए वापस लौटने के लिए साथ में एक लालटेन रख लेना सुरक्षित रहेगा।
दावत देर रात तक चली। खाने पीने का लंबा दौर चला। दावत खत्म होने के बाद बंता आनंदपूर्वक अपने घर लौट गया।
अगले सवेरे बंता के दरवाजे पर खटखटाहट हुई। संता के नौकर ने पूछा, “बंता साहब, क्या आप सही सलामत घर पहुंच गए थे? मुझे पूछ्ने को भेजा गया है।” बंता ने मुस्कराते हुए जवाब दिया, “अरे हां , मुझे रास्ते में कोई परेशानी नहीं हुई थी।”
नौकर ने जवाब दिया, “दरअसल कल रात आप अपनी लालटेन वहीं छोड़ आए थे और इसकी जगह तोते का पिंजरा उठा लाए थे। मैं आपकी लालटेन देकर तोते का पिंजरा लेने आया हूं।”
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