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छह महीनों बाद बेहतर हालात में होंगे बाजार
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17 नवम्बर 2008
moneycontrol.com
पोर्टफोलियो मैनेजर पीएन.विजय के अनुसार यह कहना काफी मुश्किल है कि दिसम्बर के अंत तक बाजार किस तरह बर्ताव करेंगे। बाजार में अक्टूबर में आई गिरावट को देखते हुए वे यहां के हालात छः महीने के बाद ही कुछ बेहतर होने की उम्मीद करते हैं।
पीएन.विजय की सीएनबीसी-टीवी18 के साथ बातचीत के खास अंश:
सवाल: साल के अंत की ओर जाते हुए बाजार के बारे में आपके क्या विचार हैं?
जवाब: यह बताना काफी मुश्किल काम है। हमारे सामने एक-एक करके मुश्किलें आती रहीं। साल 2008 काफी बुरा रहा और सारे आधार टूट गए – पहले तेल की कीमतें, फिर साख की समस्या और अब वैश्विक मंदी का खतरा।
साफ तौर पर सरकार एक मुश्किल लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने ऋण प्रणाली के लिए और मांग बढ़ाने के लिए कई लाख करोड़ रुपए का बंदोबस्त किया। सप्ताहांत में उन्होंने वॉशिंगटन में वित्तीय तंत्र को और बढ़ावा देने पर जोर दिया।
कोई भी केवल यह कह सकता है कि अब से छः महीने बाद हालात आज से कहीं बेहतर होंगे। लेकिन 31 दिसम्बर तक हालात कैसे होंगे यह कहना मुश्किल है।
सवाल: अगर हम अक्टूबर के निचले स्तर देखें बिना भी यह साल गुजार लेते हैं तो उसके बाद आप आने वाले चुनावों को बाजार के लिए कैसा देखते हैं?
जवाब: मैं इनका ज्यादा असर नहीं देखता, क्योंकि भारत में चुनाव की तस्वीर धीरे-धीरे उभरकर स्पष्ट हो रही है। दोनों ही पक्षों में गठबंधन होने लगे हैं और सबसे अच्छी बात है कि कम्युनिस्ट दल किनारे होते जा रहे हैं। मैंने पिछले एक महीने में किसी भी कम्युनिस्ट की ओर से कोई भी खबर अखबार में नहीं पढ़ी है, तो यह शेयर बाजारों के लिए एक अच्छी खबर है।
तो हमारे साथ या तो कांग्रेस के नेतृत्व वाला एक गठबंधन होगा या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाला, दोनों ही कम्युनिस्ट के बिना बाजार के लिए फायदेमंद होंगे। बेशक, इस सब चीजों के कारण तीन महीनों का विराम जरुर आएगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि चुनाव बाजार के लिए कुछ भी नकारात्मक लेकर आएंगे।
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पाठकों की राय 07 जनवरी 2009