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सीटीटी से टूट सकता है ‘वायदा’
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18 अगस्त 2008
वार्ता

नई दिल्ली।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने एक रिपोर्ट में कहा है कि वायदा कारोबार पर प्रस्तावित कमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (सीटीटी) का विपरीत असर पड़ेगा और इससे कारोबार 60 प्रतिशत तक गिर सकता है।

बजट 2008-09 के बजट में इस तरह का कर लगाने का प्रस्ताव किया गया है। इसमें जिन्सों का वायदा कारोबार करने वालों को एक लाख रुपए के सौदे पर 17 रुपए सीटीटी देना पड़ेगा।

मई 2006 से अप्रैल 2008 तक दो वर्षों के लिए पांच प्रमुख वस्तुओं पर किए गए सीआईआई के सर्वेक्षण से खुलासा हुआ है कि यदि इस साल एक मई को यह कर शुरू होता तो एक सप्ताह के भीतर सबसे ज्यादा 59 प्रतिशत कमी वायदा कारोबार में होती। इस कर के लगाने से ताम्बा तथा रिफाइंड सोयाबीन का वायदा कारोबार क्रमशः 53 प्रतिशत और 18 प्रतिशत घट जाएगा।

सीआईआई का कहना है कि दुनिया में किसी भी देश में इस प्रकार का कर नहीं है इसलिए इसे जब भारत में लागू किया जाएगा तो इसका घरेलू वायदा बाजार पर विपरीत असर पड़ेगा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हम प्रतियोगी नहीं बन सकेंगे। परिसंघ का कहना है कि इससे वायदा सौदों पर खर्च भी लगभग आठ गुणा तक बढ़ जाएगा और अगले दो वर्षों के दौरान चना में 93 प्रतिशत तक तथा ताम्बा के कारोबार में 36 प्रतिशत तक की गिरावट आ जाएगी।

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