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बाजार को खा रही है महंगाई की चिंता
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18 अगस्त 2008
वार्ता

नई दिल्ली।
देश के शेयर बाजारों में आगामी सप्ताह उठापटक की अधिक सम्भावना है। बीते सप्ताह शेयर बाजारों में पांच हफ्ते से चली आ रही तेजी का सिलसिला थम गया। मुम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 444 अंक टूटकर एक सप्ताह के बाद फिर 15 हजार अंक से नीचे उतर आया। राष्ट्रीय शेयर बाजार (एनएसई) को 99 अंक का झटका लगा।

कच्चे तेल के दामों में गिरावट और विश्व बाजार के रुख को देखते हुए बीते सप्ताह की शुरुआत में बाजार अच्छे मूड में लग रहा था, किंतु ऊंचे भावों पर मुनाफावसूली और औद्योगिक उत्पादन तथा छह प्रमुख बुनियादी सुविधा क्षेत्र के निराशाजनक आंकड़ों से मंगलवार से बाजार टूटने लगा और फिर इससे ऊबर नहीं पाया।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में जो कारक नजर आ रहे हैं उन्हें देखते हुए शेयर बाजारों में उठापटक की अधिक सम्भावना है।

दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपिटल मार्केट लिमिटेड के प्रमुख अशोक अग्रवाल का कहना है कि कच्चे तेल के दामों में गिरावट सकारात्मक संकेत है, किंतु महंगाई की दर चिंता का विषय है। इसके अलावा छठे वेतन आयोग की घोषणा और इसके तहत एक सितम्बर से नई तनख्वाह लोगों को मिलने लगेगी। इस पैसे के बाजार में आने पर मांग बढ़ने से महंगाई की दर पर और दबाव बढ़ सकता है।

महंगाई की दर दो अगस्त को समाप्त सप्ताह में 16 वर्ष के उच्चतम स्तर 12.44 प्रतिशत पर पहुंच गई है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने महंगाई को एक चुनौती बताया है। वित्त मंत्री पी.चिदम्बरम ने भी चार सप्ताह तक महंगाई की दर में धीमी बढ़ोतरी के बाद तीव्र वृद्धि पर निराशा जताई है।

बीते सप्ताह चार कारोबारी दिवसों के दौरान बीएसई का सेंसेक्स 443.64 अंक अर्थात 2.92 प्रतिशत गिरकर 14,724.18 अंक रह गया। एनएसई का निफ्टी 2.18 प्रतिशत अथवा 98.80 अंक के नुकसान से 4,430.70 अंक रह गया। पंद्रह अगस्त को बाजार स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में बंद रहा था। इस प्रकार तीन दिन की छुट्टी के बाद अब सोमवार को बाजार फिर खुलेगें।

भारतीय प्रतिभूति एवं नियामक बोर्ड (सेबी) के पार्टिसिपेटरी नोट्स पर विचार-विमर्श के बावजूद कोई फैसला नहीं लिए जाने से भी बाजार पर असर पड़ा। बाजार इसमें कुछ रियायत की उम्मीद कर रहा था। सेबी अध्यक्ष सी.बी.भावे ने कहा कि इस पर विचार-विमर्श तो हुआ, किंतु कोई फैसला नहीं लिया गया।

उधर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सप्ताह के दौरान जारी रिपोर्ट भी बाजार के लिए कोई अच्छी खबर नहीं रही। परिषद के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की बढ़ोतरी 7.7 प्रतिशत तक रहेगी। वर्ष 2007-08 में यह नौ प्रतिशत रही थी। परिषद ने इस वर्ष जनवरी में जीडीपी में साढ़े आठ प्रतिशत बढ़ोतरी की सम्भावना जताई थी।

कच्चे तेल की कीमतों के तीन माह के निम्नस्तर तक पहुंच जाने के समाचारों के बीच वाहन कम्पनियों के लिए यात्री कारों की बिक्री में 33 माह के बाद जुलाई के दौरान 1.7 प्रतिशत की गिरावट बुरी खबर रही। भारतीय वाहन निर्माता संस्था (सियाम) के मुताबिक जुलाई में यात्री कारों की बिक्री 1.7 प्रतिशत गिरकर 87 हजार 724 कार रह गई।

रिजर्व बैंक की कठोर मौद्रिक नीति के चलते औद्योगिक उत्पादन जून में पिछले साल के 8.9 प्रतिशत की तुलना में गिरकर 5.4 प्रतिशत रह गई। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि पिछले साल के 10.3 प्रतिशत की तुलना में गिरकर 5.2 प्रतिशत रह गई।

इस वर्ष सेंसेक्स में अब तक 27.42 प्रतिशत अर्थात 5,562.81 अंक की गिरावट आई चुकी है। वर्ष 2008 की समाप्ति पर सेंसेक्स 20,286.99 अंक रहा था। सेंसेक्स के इस वर्ष दस जनवरी के 21,206.77 अंक के रिकॉर्ड से तुलना की जाए तो यह गिरावट 30.56 प्रतिशत अर्थात 6,482.59 अंक है।

सप्ताह के दौरान बीएसई के मिडकैप में 1.07 प्रतिशत अर्थात 63.55 अंक का नुकसान हुआ। इस वर्ग का सूचकांक 5,823.42 अंक रह गया। बीएसई स्मॉलकैप करीब एक प्रतिशत अथवा 71.30 प्रतिशत गिरकर 7,110.44 अंक रह गया।

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) जो जुलाई माह के अंत तक बिकवाल बने हुए थे, अगस्त में खरीदार दिखे। तेरह अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थानों ने 986.10 करोड़ रुपए मूल्य की इक्विटी खरीदी है। इस वर्ष संस्थानों की बिकवाली 26 हजार 315 करोड़ 90 लाख रुपए की रही। साझा कोषों ने 12 अगस्त तक 228 करोड़ 60 लाख रुपए की बिकवाली की है।

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