07 सितम्बर 2008
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फेंग शुई की धारणा- यिन यांग
यिन(स्त्रीलिंग) और यांग (पुल्लिंग) विपरीतता के सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करते हैं। द्वैतवाद, जो कि प्रकाश और अन्धकार, गति और ठहराव के बीच के अंतर को समझने से विकसित होता है। मूलभूत तौर पर दोनों एक दूसरे पर निर्भर हैं। जहां यिन को यांग में पाया जा सकता है वहीं यांग को यिन में। और एक दूसरे के बगैर दोनों का अस्तित्व ही नहीं है। उदाहरण के लिए दिन, रात के बिना अस्तित्व में नहीं रह सकता। और इसी तरह अन्धकार के बिना प्रकाश का भी अस्तित्व नहीं है।

यिन और यांग को बदलाव की उस प्रक्रिया के तहत भी देखा जा सकता है जो किसी प्रक्रिया में बदलाव के विभिन्न चरणों की व्याख्या करता है। उदाहरण के लिए, ठंडे पानी (यिन) को उबालनेपर वह भाप (यांग) में परिवर्तित हो जाता है।
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